कर्नाटक हाई कोर्ट ने समान नाम का फायदा उठाने की कोशिश को खारिज किया
समान नाम का फायदा उठाकर पुश्तैनी जमीन पर नहीं कर सकते कब्जा, कर्नाटक हाई कोर्ट ने असली मालिकों को लौटाई जमीन
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Image: Jagran
कर्नाटक हाई कोर्ट ने जी.बी. हट्टी गांव में तीन भाइयों को उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि का वैध मालिक घोषित किया, जबकि बसप्पा को बिना वैध दस्तावेजों के दावा खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल नाम दर्ज होने से स्वामित्व सिद्ध नहीं होता।
- 01कर्नाटक हाई कोर्ट ने जी. थिप्पेस्वामी, जी. विरुपाक्षप्पा और जी. राजशेखरप्पा को विवादित भूमि का वैध संयुक्त मालिक घोषित किया।
- 02बसप्पा ने 1946 में बिक्री का दावा किया लेकिन कोई वैध बिक्री विलेख प्रस्तुत नहीं किया।
- 03अदालत ने कहा कि केवल राजस्व रिकॉर्ड में नाम होने से स्वामित्व सिद्ध नहीं होता।
- 04भाइयों ने 1930 की पंजीकृत बंधक डीड और अन्य दस्तावेज पेश किए।
- 05अदालत ने बसप्पा को जमीन के कब्जे में हस्तक्षेप करने से रोका।
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने जी.बी. हट्टी गांव में तीन भाइयों को उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि का वैध संयुक्त मालिक घोषित किया। अदालत ने बसप्पा द्वारा समान नाम का फायदा उठाकर भूमि पर दावा करने की कोशिश को खारिज कर दिया। बसप्पा ने 1946 में दावा किया था कि भाइयों के पूर्वजों ने उनकी जमीन बेची थी, लेकिन वह कोई वैध बिक्री विलेख पेश नहीं कर सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल राजस्व रिकॉर्ड में नाम होने से स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। भाइयों ने अदालत में 1930 की पंजीकृत बंधक डीड और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिससे साबित हुआ कि उनकी जमीन कभी बेची नहीं गई। अदालत ने बसप्पा को आदेश दिया कि वह विवादित जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता। यह मामला 1997 से चल रहा था और निचली अदालत का फैसला पलटते हुए हाई कोर्ट ने भाइयों के पक्ष में निर्णय दिया।
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इस फैसले से स्थानीय भूमि विवादों में स्पष्टता आएगी और समान नाम का लाभ उठाने की प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी।
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