घर खरीदें या किराए पर रहें: दिल्ली-एनसीआर में सही विकल्प क्या है?
Buying Vs Renting: किराया 30 हजार, EMI 50 हजार, महंगाई के दौर में रेंट पर रहे या घर खरीदें, क्या है सही फैसला?
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
दिल्ली-एनसीआर में महंगाई के चलते घर खरीदना निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि घर खरीदने या किराए पर रहने का निर्णय आपकी वित्तीय स्थिति और रहने की योजना पर निर्भर करता है।
- 01महंगाई के कारण घर खरीदना मुश्किल हो रहा है।
- 02किराए पर रहने के फायदे में कोई डाउन पेमेंट न करना शामिल है।
- 03घर खरीदने से संपत्ति बनती है और लंबे समय में लाभ होता है।
- 04ईएमआई किराए से अधिक होने पर किराए पर रहना बेहतर विकल्प हो सकता है।
- 05प्रॉपर्टी की कीमत और सालाना किराए का अनुपात निर्णय लेने में मदद करता है।
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दिल्ली-एनसीआर में महंगाई के कारण घर खरीदना निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए कठिन हो गया है। 1 से 3 बीएचके फ्लैट्स की कीमतें 50 लाख से लेकर 25 करोड़ रुपये तक हैं, जबकि किराए 10 हजार से 50 हजार रुपये प्रति माह तक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घर खरीदने का निर्णय आपकी वित्तीय स्थिति और रहने की योजना पर निर्भर करता है। यदि आपकी ईएमआई किराए से दोगुनी है, तो किराए पर रहना बेहतर हो सकता है। घर खरीदने पर संपत्ति बनती है और लंबे समय में यह लाभकारी होता है। हालांकि, महंगाई बढ़ने से होम लोन की ईएमआई भी बढ़ सकती है। ऐसे में, यदि आप 7-10 साल तक एक ही शहर में रहने की योजना बना रहे हैं, तो घर खरीदना समझदारी हो सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रॉपर्टी की कीमत को सालाना किराए से भाग देने पर यदि अनुपात 20 से कम है, तो घर खरीदना सही माना जाता है।
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महंगाई के कारण घर खरीदने की लागत बढ़ रही है, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए घर खरीदना मुश्किल हो रहा है।
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