सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना सिंबल विवाद पर राजनेताओं को दी चेतावनी
‘ऐसे बयान बर्दाश्त नहीं करेंगे’, शिवसेना सिंबल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
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सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के चुनाव चिह्न विवाद पर कुछ राजनेताओं के 'गैर-जिम्मेदाराना बयानों' पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मामले की सुनवाई 30 जुलाई को होगी। उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनका चुनाव चिह्न एकनाथ शिंदे गुट को आवंटित किया गया था।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि राजनेताओं को गैर-जिम्मेदाराना बयान देने से बचना चाहिए।
- 02मामले की सुनवाई 30 जुलाई 2023 को तय की गई है।
- 03उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के 17 फरवरी 2023 के आदेश को चुनौती दी है।
- 04सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक विवाद पर भी सुनवाई करेगा।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर भी विचार किया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कुछ राजनेताओं के 'गैर-जिम्मेदाराना बयानों' पर कड़ी नाराजगी जताई, जिन्होंने आरोप लगाया था कि शिवसेना के चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद की सुनवाई नहीं हो रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि इस तरह का बर्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़े पक्षों ने खुद सुनवाई के लिए तारीखें मांगी थीं। कोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट के वकील से कहा कि उन्हें मीडिया में ऐसे बयान देने से रोकना चाहिए। एकनाथ शिंदे गुट के वकील ने कहा कि अदालत के खिलाफ बयान देना उचित नहीं है। मामले की सुनवाई 30 जुलाई को होगी। उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनका चुनाव चिह्न 'तीर-कमान' एकनाथ शिंदे गुट को आवंटित किया गया था। इसके अलावा, ठाकरे गुट ने स्पीकर के निर्णय को भी चुनौती दी है, जिसमें पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न शिंदे गुट को सौंपा गया था।
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इस विवाद का राजनीतिक प्रभाव महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करेगा।
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