भारत में धुआं रहित तंबाकू का बढ़ता संकट: गुटखा और खैनी के खतरनाक प्रभाव
दो रुपये का नशा, चुकानी पड़ रही करोड़ों की कीमत... भारत को अंदर से खा रहा गुटखा, सिगरेट से ज्यादा खतरनाक
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Image: Jagran
भारत में तंबाकू का सेवन एक गंभीर समस्या बन चुका है, खासकर धुआं रहित तंबाकू जैसे गुटखा और खैनी का। लगभग 20 करोड़ लोग रोजाना इन उत्पादों का उपयोग करते हैं, जो सस्ते और आसानी से उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चेतावनियों से समस्या का समाधान नहीं होगा।
- 01भारत में लगभग 20 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का सेवन करते हैं, जिसमें गुटखा और खैनी शामिल हैं।
- 02धुआं रहित तंबाकू उत्पादों से 28 से अधिक प्रकार के कैंसर पैदा करने वाले तत्व निकाले जा चुके हैं।
- 03ग्रामीण भारत के गरीब परिवार अपने कुल खर्च का लगभग 4% तंबाकू पर खर्च करते हैं, जबकि शिक्षा पर केवल 2.5%।
- 04गुटखा का उपयोग करने वाले लोग इसे सस्ता नशा मानते हैं, जो भूख को दबाने में मदद करता है।
- 05विशेषज्ञों का सुझाव है कि तंबाकू उत्पादों की कीमत बढ़ाना और उन्हें कम सुलभ बनाना अधिक प्रभावी उपाय हो सकता है।
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भारत में तंबाकू का सेवन, विशेष रूप से धुआं रहित तंबाकू जैसे गुटखा और खैनी, एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 20 करोड़ लोग रोजाना इन उत्पादों का उपयोग करते हैं, जो सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय की डॉ. मधुरिमा नंदी के अनुसार, धुआं रहित तंबाकू उत्पादों में 28 से अधिक कैंसर पैदा करने वाले तत्व पाए गए हैं। ग्रामीण भारत के गरीब परिवार तंबाकू पर अपने खर्च का लगभग 4% खर्च करते हैं, जबकि शिक्षा पर केवल 2.5%। गुटखा सस्ती कीमत पर मिलने वाला नशा है, जो भूख को कुछ समय के लिए दबा देता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इन्हें महंगा और कम सुलभ बनाना अधिक प्रभावी हो सकता है। इसके अलावा, तंबाकू नियंत्रण कानूनों को सख्त बनाने और जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
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तंबाकू सेवन से जुड़ी बीमारियों के कारण लाखों परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते हैं।
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