पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का निर्णय: पूर्व प्रेमी से मुलाकात व्यभिचार नहीं
Highcourt: पूर्व प्रेमी से एक मुलाकात व्यभिचार नहीं, पुराने रिश्ते को शादी के बाद का अवैध संबंध नहीं कह सकते

Image: Amar Ujala
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि एक महिला का पूर्व प्रेमी से एक बार मिलना व्यभिचार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी से पहले का संबंध विवाह के बाद व्यभिचार नहीं बनता, और पति के आरोपों को खारिज कर दिया।
- 01हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व प्रेमी से एक बार मिलना व्यभिचार नहीं है।
- 02शादी से पहले का संबंध विवाह के बाद व्यभिचार की श्रेणी में नहीं आता।
- 03पति ने पत्नी पर आरोप लगाया कि वह शादी के बाद भी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में थी।
- 04पत्नी ने सभी आरोपों से इनकार किया और पति पर दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए।
- 05कोर्ट ने पति के आरोपों को मानसिक क्रूरता के रूप में माना।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी महिला का पूर्व प्रेमी से एक बार मिलना व्यभिचार साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि शादी से पहले का संबंध विवाह के बाद व्यभिचार की श्रेणी में नहीं आता। इस मामले में, पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी 11 जनवरी 2023 को अपने पूर्व प्रेमी के घर पर मिली थी। पत्नी ने इन आरोपों का खंडन किया और पति पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया। अदालत ने पति के आरोपों को लापरवाह और झूठा माना, यह कहते हुए कि बिना ठोस साक्ष्य के ऐसे आरोप मानसिक क्रूरता के दायरे में आते हैं। अदालत ने पारिवारिक अदालत के फैसले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं समझी और कहा कि विवाह विच्छेद का आधार पत्नी का क्रूर व्यवहार था, न कि व्यभिचार।
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इस निर्णय से वैवाहिक विवादों में व्यभिचार की परिभाषा पर स्पष्टता आई है।
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