बिहार में सचेतकों की सूची में असमंजस: सम्राट चौधरी की चिट्ठियों से बढ़ी कंफ्यूजन
Bihar Politics: सम्राट चौधरी की दो वायरल चिट्ठी से बढ़ा कंफ्यूजन, सचेतक की लिस्ट में फेरबदल से जानिए किस नेता का कटा पत्ता
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बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन ने 11 सचेतकों की सूची जारी की है, लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की दो अलग-अलग चिट्ठियों ने स्थिति को जटिल बना दिया है। दोनों सूचियों में 11-11 नाम थे, लेकिन वे एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। यह मामला कई विधायकों के लिए असमंजस का कारण बन गया है।
- 01सचेतकों की पहली सूची में सुल्तानगंज विधायक ललित नारायण मंडल का नाम था, जबकि दूसरी सूची में विनय चौधरी का नाम शामिल था।
- 02मुख्य सचेतक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है, जबकि सचेतक को राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाता है।
- 03संजय चौरसिया, मंजीत सिंह, राजू तिवारी और रत्नेश कुमार जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी, लेकिन अब उन्हें सचेतक बनाया गया है।
- 04मंजीत सिंह को उपमुख्य सचेतक बनाया गया है, जो जदयू के तेजतर्रार नेता माने जाते हैं।
- 05राजू तिवारी, जो लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं, को मंत्री नहीं बनने के कारण नाराजगी थी, लेकिन उन्हें अब सचेतक बनाया गया है।
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बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन ने 11 सचेतकों की आधिकारिक सूची जारी की है, लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की दो अलग-अलग चिट्ठियों ने स्थिति को जटिल बना दिया है। दोनों सूचियों में 11-11 नाम शामिल थे, लेकिन वे आपस में मेल नहीं खाते। इससे कई विधायकों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पहली चिट्ठी में सुल्तानगंज विधायक ललित नारायण मंडल का नाम था, जबकि दूसरी में विनय चौधरी का नाम शामिल था। इस स्थिति ने मंत्रियों और बीजेपी के नेताओं को वास्तविक सूची जानने के लिए परेशान कर दिया। सचेतकों के माध्यम से बिहार सरकार उन नेताओं को रिझाने की कोशिश कर रही है, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। मुख्य सचेतक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है, जबकि सचेतक को राज्य मंत्री का। इस बार संजीव चौरसिया, मंजीत सिंह, राजू तिवारी और रत्नेश कुमार जैसे नेताओं को सचेतक बनाया गया है। इन नेताओं का चयन सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने के उद्देश्य से किया गया है।
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सचेतकों की नियुक्ति से उन नेताओं को समर्थन मिलेगा जिन्हें मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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