इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: सार्वजनिक स्थलों पर नमाज के लिए नहीं मिलेगी इजाजत
खुली जगह में नमाज की इजाजत नहीं... सरकार को दखल देने का अधिकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों पर नमाज अदा करने की अनुमति देने से इनकार किया है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक भूमि सभी के लिए है और इसका एकाधिकार नहीं हो सकता। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों को समान पहुंच और बिना भेदभाव वाला प्रशासन प्रदान करे।
- 01इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी।
- 02कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक भूमि सभी के लिए है और इसका एकाधिकार नहीं हो सकता।
- 03राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों को समान पहुंच सुनिश्चित करे।
- 04अदालत ने कहा कि धार्मिक आजादी के नाम पर सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा नहीं किया जा सकता।
- 05सार्वजनिक स्थलों पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार को दखल देने का अधिकार है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में सार्वजनिक स्थलों पर नमाज अदा करने की अनुमति देने से इनकार किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थल सभी के लिए होते हैं और किसी एक पक्ष का उस पर एकाधिकार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि धार्मिक आजादी के नाम पर सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों को समान पहुंच और बिना भेदभाव वाला प्रशासन प्रदान करे। अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें संभल में आबादी भूमि के हिस्से में नमाज अदा करने की अनुमति मांगी गई थी। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक भूमि का उपयोग करने से आने-जाने और सुरक्षा पर असर पड़ता है, इसलिए इसे नियमित किया जाना चाहिए।
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इस फैसले से सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक आयोजनों की अनुमति नहीं मिलने से नागरिकों को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का पालन करने में कठिनाई हो सकती है।
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