ISI का जासूसी नेटवर्क: भारतीय युवाओं को 500 रुपये में गुमराह करने की रणनीति
500-500 रुपये का लालच देकर भारतीय युवाओं को गुमराह कर रही ISI, ऐसे काम करता है नेटवर्क

Image: Jagran
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारतीय युवाओं को महज 500 रुपये में जासूसी के लिए भर्ती कर रही है। यह नेटवर्क भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए काम करता है, जिसमें रेलवे स्टेशनों पर बैठे युवाओं को जानकारी इकट्ठा करने के लिए कहा जाता है। इस प्रकार का जासूसी नेटवर्क खुफिया जानकारी जुटाने के लिए सस्ता और प्रभावी साबित हो रहा है।
- 01आईएसआई भारतीय युवाओं को 500 से 1,000 रुपये के बीच भुगतान करती है, जिससे वे जासूसी के लिए तैयार हो जाते हैं।
- 02युवाओं को रेलवे स्टेशनों पर भारतीय सैनिकों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए कहा जाता है।
- 03कम लागत वाले जासूसों का नेटवर्क बिना जीपीएस वाले सस्ते फोन का उपयोग करता है, जिससे ट्रैक करना मुश्किल होता है।
- 04आईएसआई के पास सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने वाले नेटवर्क भी हैं, जिन्हें 10,000-15,000 रुपये प्रति कैमरा भुगतान किया जाता है।
- 05व्हाइट-कालर नेटवर्क में पढ़े-लिखे लोग शामिल होते हैं, जिन्हें 50,000-75,000 रुपये के बीच भुगतान किया जाता है।
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत में अपने जासूसी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए, आईएसआई ने भारतीय युवाओं को महज 500 रुपये में जासूसी के लिए भर्ती करना शुरू कर दिया है। ये युवा रेलवे स्टेशनों पर बैठकर सैनिकों की आवाजाही की जानकारी इकट्ठा करते हैं, जो भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण है। इन कम लागत वाले जासूसों का नेटवर्क ट्रैक करना मुश्किल है क्योंकि वे सस्ते फोन का उपयोग करते हैं और काम पूरा होने के बाद सिम कार्ड फेंक देते हैं। आईएसआई ने सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए भी नेटवर्क स्थापित किया है, जिसमें प्रत्येक कैमरे के लिए 10,000-15,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा, पढ़े-लिखे लोगों का एक व्हाइट-कालर नेटवर्क भी है, जो संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए 50,000-75,000 रुपये के बीच कमाता है। इस प्रकार, आईएसआई का यह जासूसी नेटवर्क भारतीय युवाओं को पैसे के लालच में फंसा रहा है।
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इस नेटवर्क की गतिविधियाँ भारतीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं, जिससे युवाओं को जासूसी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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