शनि जयंती पर 50 साल बाद बन रहा केदार योग, जानें इसका महत्व
Kurukshetra News: शनि जयंती आज, 50 साल बाद बन रहा केदार योग
Amar Ujala
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आज शनि जयंती पर एक विशेष ज्योतिषीय संयोग, केदार योग, बन रहा है जो लगभग 50 वर्षों के बाद हो रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज कौशिक के अनुसार, इस दिन विशेष व्रत करने से भक्तों को शनि के साढ़े साती के कठोर प्रभावों से राहत मिल सकती है।
- 01केदार योग का निर्माण ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे 50 वर्षों में पहली बार देखा जा रहा है।
- 02भगवान शनि की जयंती पर व्रत करने से अनुशासन और न्याय का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- 03अमावस्या तिथि 16 मई, 2026 को सुबह 05:11 बजे शुरू होगी और 17 मई को सुबह 01:30 बजे समाप्त होगी।
- 04यह संयोग शनिवार को पड़ रहा है, जो भगवान शनि का दिन है।
- 05पंडित बलराज कौशिक के अनुसार, यह समय प्रार्थना और प्रसाद के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली है।
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कुरुक्षेत्र में आज शनि जयंती का पर्व मनाया जा रहा है, जो आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन ग्रहों की एक विशेष स्थिति बन रही है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में केदार योग कहा जाता है। यह दुर्लभ योग लगभग 50 वर्षों के बाद बन रहा है और इसे भगवान शनि की जयंती का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज कौशिक के अनुसार, इस दिन भक्तिपूर्वक व्रत करने से भक्तों को शनि के साढ़े साती जैसे कठोर प्रभावों से राहत मिल सकती है। इसके अलावा, अनुशासन और न्याय का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। पंडित बलराज कौशिक ने बताया कि अमावस्या तिथि 16 मई, 2026 को सुबह 05:11 बजे शुरू होगी और 17 मई को सुबह 01:30 बजे समाप्त होगी। यह समय प्रार्थना और प्रसाद के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली है। यह संयोग शनिवार को पड़ रहा है, जो भगवान शनि का दिन है, इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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इस दिन व्रत करने से भक्तों को शनि के साढ़े साती के प्रभावों से राहत मिल सकती है, जिससे उनकी जीवन में अनुशासन और न्याय का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
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