वास्तु शास्त्र: तीन प्रमुख स्थान जिनमें दोष से बचना आवश्यक
कष्ट, कलह, कर्ज... वास्तु के ये 3 भयंकर दोष जिंदगीभर नहीं छोड़ते पीछा
Aaj Tak
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वास्तु शास्त्र में ईशान कोण, दक्षिण-पश्चिम दिशा और ब्रह्म स्थान तीन महत्वपूर्ण स्थान हैं, जहां वास्तु दोष का होना जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इन स्थानों को दोषमुक्त रखना ही खुशहाली का रास्ता है।
- 01ईशान कोण में रसोई या टॉयलेट होने से प्रेग्नेंसी से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
- 02दक्षिण-पश्चिम दिशा में गड्ढा या मुख्य द्वार होने से पारिवारिक रिश्तों में दिक्कत और कर्ज की समस्या हो सकती है।
- 03ब्रह्म स्थान पर भारीपन या गड्ढा होना वास्तु दोष है, जो घर की ऊर्जा को प्रभावित करता है।
- 04इन तीन स्थानों का वास्तु दोष दूर करने के उपाय नहीं होते हैं।
- 05यदि ये तीन स्थान दोषमुक्त हैं, तो व्यक्ति संतुलित ऊर्जा वाले घर में निवास करता है।
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वास्तु शास्त्र में तीन स्थानों को विशेष महत्व दिया गया है, जिनमें वास्तु दोष का होना व्यक्ति के जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है। ये स्थान हैं: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा), दक्षिण-पश्चिम दिशा, और ब्रह्म स्थान (घर का केंद्र)। यदि ईशान कोण में रसोई या टॉयलेट है, तो यह महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी से संबंधित समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। इस दिशा में लाल रंग भी दोष का कारण बनता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में गड्ढा या मुख्य द्वार होने से पारिवारिक रिश्तों में दिक्कत और कर्ज की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ब्रह्म स्थान को हमेशा खाली रखना चाहिए, क्योंकि यहां भारीपन या गड्ढा होने से घर की ऊर्जा प्रभावित होती है। इन तीन स्थानों को वास्तु दोषमुक्त रखना ही व्यक्ति की खुशहाली का एकमात्र उपाय है।
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वास्तु दोष के कारण व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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