मल्हार में प्राचीन ताम्रपत्र की खोज: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान
मल्हार में छटवीं-सातवीं शताब्दी का ताम्रपत्र मिलना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात- अरुण साव

Image: Globalherald
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार में छठी-सातवीं शताब्दी का ताम्रपत्र मिलना राज्य के लिए गर्व की बात है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इसे भारतीय संस्कृति की समृद्धि का प्रतीक बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संरक्षण अभियान की सराहना की।
- 01मल्हार में छठी-सातवीं शताब्दी का ताम्रपत्र मिला है, जो छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।
- 02उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इसे भारत की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्धि का प्रतीक बताया।
- 03प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में इस खोज का उल्लेख किया।
- 04भारत में प्राचीन ताम्रपत्रों की खोज और संरक्षण का कार्य जारी है।
- 05साव ने 'मन की बात' कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।
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बिलासपुर जिले के मल्हार में छठी-सातवीं शताब्दी का ताम्रपत्र मिलने की खबर छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस खोज को भारतीय संस्कृति की समृद्धि का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि यह खोज न केवल राज्य के लिए, बल्कि देश की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में इस ताम्रपत्र का उल्लेख किया, जो दर्शाता है कि भारत में प्राचीन ताम्रपत्रों की खोज और संरक्षण का कार्य जारी है। साव ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया, जिसमें प्रधानमंत्री ने देश की विविधता और विभिन्न क्षेत्रों के आमों की विशेषताओं का उल्लेख किया। उन्होंने सभी नागरिकों से 'मन की बात' सुनने की अपील की, ताकि वे नई जानकारी और प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
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यह खोज छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देगी और राज्य में पर्यटन को आकर्षित कर सकती है।
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