राजस्थान हाई कोर्ट ने बिना तलाक दूसरी शादी को खारिज किया
'पहली पत्नी से तलाक लिए बगैर दूसरी शादी शून्य', राजस्थान हाई कोर्ट इस मामले में पति की अपील खारिज की
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राजस्थान हाई कोर्ट ने एक पति की अपील को खारिज कर दिया, जिसने बिना कानूनी तलाक लिए दूसरी शादी की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पहली पत्नी से तलाक लिए बिना दूसरी शादी शून्य है और इसे कोई कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।
- 01राजसमंद जिले के एक युवक ने 1992 में पहली शादी की थी और 1997 में बिना तलाक दूसरी शादी कर ली थी।
- 02पति ने अपनी दूसरी पत्नी को आधार कार्ड पर पत्नी के रूप में दर्ज कराया।
- 03फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की अर्जी 24 मई 2023 को खारिज कर दी थी।
- 04कोर्ट ने कहा कि दूसरी पत्नी को पत्नी मानकर रहने से पहली पत्नी का अलग रहना क्रूरता नहीं है।
- 05हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना तलाक दूसरी शादी को कानूनी मान्यता नहीं दी।
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राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में बिना कानूनी तलाक लिए दूसरी शादी करने वाले पति की अपील को खारिज कर दिया। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने राजसमंद की फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पहली पत्नी से तलाक लिए बिना की गई दूसरी शादी शून्य है। यह मामला एक युवक से संबंधित है, जिसने 5 मई 1992 को भीलवाड़ा की एक महिला से शादी की थी। 1997 में, पति ने बिना तलाक लिए दूसरी महिला के साथ नाता स्थापित किया और उसके साथ रहने लगा। इस दौरान, उसने अपनी दूसरी पत्नी को आधार कार्ड पर पत्नी के रूप में दर्ज भी कराया। परिवार न्यायालय ने 24 मई 2023 को पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि जब पति दूसरी महिला को पत्नी मानकर रह रहा है, तो पहली पत्नी का अलग रहना या शिकायत करना क्रूरता नहीं है, बल्कि एक उचित प्रतिक्रिया है।
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यह निर्णय उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो विवाह और तलाक के कानूनी पहलुओं को समझना चाहते हैं।
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