इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी: न्याय में देरी के लिए केवल न्यायिक अधिकारी नहीं, राज्य और पुलिस भी जिम्मेदार
‘तारीख पर तारीख’ के लिए केवल न्यायिक अधिकारी जिम्मेदार नहीं, लंबित आपराधिक मामलों पर हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने न्याय में देरी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल न्यायिक अधिकारी ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकार और पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और आवश्यक संसाधनों की कमी पर चिंता जताई और राज्य सरकार को सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया।
- 01हाई कोर्ट ने न्याय में देरी के लिए न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार और पुलिस को भी जिम्मेदार ठहराया।
- 02अदालत ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और संसाधनों की कमी पर चिंता जताई।
- 03उत्तर प्रदेश में 49 प्रतिशत मंत्री आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।
- 04अदालत ने एफएसएल प्रयोगशालाओं की स्थिति और डीएनए प्रोफाइलिंग की कमी पर भी ध्यान दिया।
- 05राज्य सरकार को न्यायिक अधिकारियों को निजी सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान न्याय में देरी पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यह केवल न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि राज्य सरकार और पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को अपर्याप्त स्टाफ, पुलिस के असहयोग और त्रुटिपूर्ण जांच के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाए। इसके अलावा, कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा की स्थिति पर भी चिंता जताई और राज्य सरकार को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में 49 प्रतिशत मंत्री आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, जिसमें से 44 प्रतिशत गंभीर मामलों में आरोपी हैं।
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इस निर्णय से न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की संभावना है, जिससे आम लोगों को न्याय मिलने में तेजी आ सकती है।
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