बिहार में परिवार की अवधारणा में बदलाव: संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर
Bihar News : पहले दादा-दादी का साथ था, अब मोबाइल का सहारा, बदल गई परिवार की अवधारणा
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बिहार के मुजफ्फरपुर में परिवारों की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। पहले संयुक्त परिवार का महत्व था, लेकिन अब शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण एकल परिवारों की संख्या बढ़ रही है। इससे मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और तनाव में वृद्धि हो रही है।
- 01शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण संयुक्त परिवारों का टूटना एक प्रमुख समस्या है।
- 02महिलाएं अब आत्मनिर्भर हो गई हैं, जिससे पारिवारिक संरचना में बदलाव आ रहा है।
- 03एकल परिवारों में जिम्मेदारियों का दबाव एक व्यक्ति पर होता है, जिससे तनाव बढ़ता है।
- 04बच्चों में अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
- 05संयुक्त परिवारों के अनुभवों से पता चलता है कि मुश्किल समय में एकजुटता से सहारा मिलता है।
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मुजफ्फरपुर, बिहार में परिवारों की संरचना में बदलाव आ रहा है। पहले संयुक्त परिवारों में दादा-दादी, चाचा-चाची और अन्य रिश्तेदार एक साथ रहते थे, जिससे बच्चों को सुरक्षा और प्यार मिलता था। अब शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण परिवारों का आकार घट रहा है और एकल परिवारों की संख्या बढ़ रही है। समाजशास्त्र के प्रोफेसर आर्य प्रिय के अनुसार, यह बदलाव रोजगार के लिए बड़े शहरों में जाने और संसाधनों की कमी के कारण हो रहा है। महिलाएं अब पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर हो गई हैं, जिससे पारिवारिक जिम्मेदारियों में बदलाव आया है। एकल परिवारों में सभी जिम्मेदारियों का बोझ एक ही व्यक्ति पर पड़ता है, जिससे तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। उदाहरण के लिए, मुजफ्फरपुर की निशा मेहता ने बताया कि कैसे उनके संयुक्त परिवार ने कठिन समय में एकजुट होकर सामना किया। वहीं, दरभंगा के पंकज कुमार ने अकेलेपन और अपनों की कमी का अनुभव साझा किया। इस बदलाव से न केवल परिवारों की संरचना पर प्रभाव पड़ा है, बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
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परिवारों की संरचना में बदलाव से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
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