सुप्रीम कोर्ट ने नैचुरल गैस पर यूपी सरकार का वैट लगाने का प्रयास किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नैचुरल गैस पर यूपी सरकार नहीं लगा सकेगी वैट
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Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि राज्य नैचुरल गैस पर वैट नहीं लगा सकता। यह निर्णय 2012 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज और अन्य कंपनियों के खिलाफ टैक्स असेसमेंट को रद किया गया था।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की याचिकाओं को खारिज किया है।
- 02यह निर्णय 2012 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के अनुरूप है।
- 03नैचुरल गैस पर वैट लगाने का प्रयास राज्यों के बीच बिक्री के दायरे में आता है।
- 04सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन लेन-देन पर केवल सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी) लागू होता है।
- 05यह निर्णय रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टाटा केमिकल्स और इफको जैसी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है।
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आंध्र प्रदेश से लाई गई नैचुरल गैस पर लोकल वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) नहीं लगा सकती। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने 2012 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया, जिसने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआइएल), टाटा केमिकल्स और इफको जैसी कंपनियों के खिलाफ राज्य सरकार के टैक्स असेसमेंट के आदेशों को रद कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि नैचुरल गैस की बिक्री राज्यों के बीच होती है और इस पर केवल सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी) लागू होता है। यह निर्णय उन कंपनियों के लिए राहत प्रदान करता है जो गैस की खरीद में संलग्न हैं और इससे राज्य सरकार के राजस्व पर भी प्रभाव पड़ेगा।
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यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार के लिए राजस्व में कमी का कारण बन सकता है।
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