उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए नई शस्त्र नीति का प्रस्ताव
उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए बनेगी नई Arms Policy, कैबिनेट में रखेंगे प्रस्ताव

Image: Jagran
उत्तराखंड सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए नई शस्त्र नीति तैयार कर रही है, जिससे शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल होगी। इसमें बार-बार पुलिस सत्यापन से राहत मिलेगी और सैन्य सेवा का रिकॉर्ड लाइसेंस जारी करने का आधार बनेगा।
- 01नई शस्त्र नीति का उद्देश्य पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाना है।
- 02पूर्व सैनिकों को बार-बार पुलिस सत्यापन से राहत मिलेगी, जिससे लाइसेंस प्राप्त करना आसान होगा।
- 03सैन्य सेवा का रिकॉर्ड और कमांडिंग अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही लाइसेंस के लिए आवश्यक होंगे।
- 04यह नीति पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के योगदान को औपचारिक मान्यता देने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
- 05नीति को अंतिम रूप देने के बाद इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
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उत्तराखंड सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक नई शस्त्र नीति तैयार करने जा रही है। इस नीति के तहत शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा, जिसमें पुलिस सत्यापन जैसी बाधाओं से राहत देने की योजना है। प्रदेश में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक रहते हैं और अग्निपथ योजना के तहत सेवा देने वाले अग्निवीर भी जल्द ही घर लौटेंगे। नई नीति के अनुसार, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को बार-बार पुलिस सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी; उनकी सैन्य सेवा का रिकॉर्ड और संबंधित यूनिट के कमांडिंग अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही लाइसेंस जारी करने का आधार बनेगा। यह पहल सैनिकों को प्रशासनिक परेशानियों से राहत देने के साथ-साथ उनके योगदान को औपचारिक मान्यता देने का एक प्रयास भी है। सचिव गृह शैलेश बगौली ने बताया कि नीति पर कार्य चल रहा है और इसे जल्द ही मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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नई शस्त्र नीति पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाएगी, जिससे उनकी सुरक्षा और रोजगार सुनिश्चित होगा।
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