दिल्ली HC ने सास की संपत्ति पर बहू के अधिकार को खारिज किया
किराया न देने पर मां ने बेटे को घर से निकाला, अब सास के घर पर बहू के हक को लेकर दिल्ली HC का अहम फैसला
Jagran
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सास की स्व-अर्जित संपत्ति पर बहू का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है। यह निर्णय एक दंपति के मामले में आया, जहां बहू ने सास के खिलाफ संपत्ति में रहने का अधिकार मांगा था।
- 01दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि सास की स्व-अर्जित संपत्ति पर बहू का कोई अधिकार नहीं है।
- 02कोर्ट ने बहू की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सास की संपत्ति साझा घर नहीं थी।
- 03बहू घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम- 2005 के तहत अपने पति के खिलाफ कानूनी सुरक्षा का दावा कर सकती है।
- 04सास ने 2017 में अपने बेटे को किराया न चुकाने पर संपत्ति से बेदखल किया।
- 05सास ने संपत्ति में किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने से रोकने के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि सास की स्व-अर्जित संपत्ति पर बहू का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने बहू की याचिका को खारिज करते हुए बताया कि सास की संपत्ति साझा घर नहीं थी। मामले में, बहू ने 2014 में अपनी सास की संपत्ति में वापस रहने का प्रयास किया, लेकिन सास ने 2017 में किराया न चुकाने के कारण अपने बेटे को संपत्ति से बेदखल कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि बहू घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम- 2005 के तहत अपने पति के खिलाफ कानूनी सुरक्षा का दावा कर सकती है। इस मामले में, सास ने संपत्ति में किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने से रोकने के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया था, जिसके बाद कोर्ट ने उसके पक्ष में निर्णय दिया।
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इस निर्णय से सास-बहू के संबंधों में संपत्ति के अधिकारों को लेकर स्पष्टता आई है।
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