सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(2)(iii) पर जनहित याचिका खारिज की
हम दखल नहीं देंगे...हिंदू मैरिज एक्ट प्रावधान चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, PIL खारिज
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सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(2)(iii) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जो केवल पत्नी को तलाक की मांग करने का अधिकार देती है। अदालत ने इसे लिंग भेदभावपूर्ण मानने से इनकार किया और कहा कि यह एक विशेष कानून है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(2)(iii) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।
- 02यह प्रावधान पत्नी को तलाक की मांग करने का अधिकार देता है यदि पति-पत्नी एक वर्ष तक साथ नहीं रहते।
- 03अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि यह प्रावधान उन्हें कैसे प्रभावित करता है।
- 04CJI सूर्य कांत ने याचिकाकर्ता को सही समय का इंतजार करने की सलाह दी।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान संशोधन का रास्ता अपनाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(2)(iii) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। यह प्रावधान पत्नी को यह अधिकार देता है कि यदि पति-पत्नी के बीच एक वर्ष या उससे अधिक समय तक साथ में रहना पुनः शुरू नहीं होता, तो वह तलाक की मांग कर सकती है। याचिकाकर्ता ने इस प्रावधान को लिंग भेदभावपूर्ण बताया, लेकिन अदालत ने इसे एक विशेष कानून मानते हुए इसमें दखल देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान, CJI सूर्य कांत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि यह प्रावधान उन्हें कैसे प्रभावित करता है और क्या वह पुरुषों के स्वयंभू नेता हैं। अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में संविधान संशोधन का रास्ता अपनाना चाहिए।
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