बख्तियारपुर का नाम बदलकर 'शीलभद्रयाजी नगर' करने की मांग फिर उठी
बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग फिर तेज: 'शीलभद्रयाजी नगर' करने की फाइल 30 साल से पेंडिंग, गृह मंत्रालय से गुहार
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बख्तियारपुर का नाम बदलकर शीलभद्रयाजी नगर रखने की मांग पिछले 30 सालों से लंबित है। स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन ने इस मांग को फिर से उठाया है, यह कहते हुए कि शीलभद्रयाजी ने देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस दिशा में कार्रवाई की अपील की गई है।
- 01बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग 30 साल से लंबित है।
- 02शीलभद्रयाजी स्वतंत्रता सेनानी थे और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी सहयोगी थे।
- 031997 में बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की सहमति दी गई थी।
- 04स्वतंत्रता सेनानियों का संगठन इस मांग को फिर से उठा रहा है।
- 05मुख्यमंत्री से इस दिशा में कार्रवाई की अपील की गई है।
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बख्तियारपुर का नाम बदलकर 'शीलभद्रयाजी नगर' करने की मांग पिछले 30 सालों से गृह मंत्रालय के पास लंबित है। स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन ने एक बार फिर इस मांग को उठाया है, जिसमें कहा गया है कि शीलभद्रयाजी ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रामानंद शर्मा (अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संगठन के महासचिव) ने बताया कि शीलभद्रयाजी पहले नागरिक थे, जिन्हें लाल किले में कोर्ट-मार्शल का सामना करना पड़ा। इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील की गई है कि वे मुगल आक्रांताओं के नाम पर बसे बख्तियारपुर का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान में 'शीलभद्रयाजी नगर' करें। 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने इस नाम परिवर्तन के लिए सहमति दी थी, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।
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अगर नाम परिवर्तन होता है, तो यह स्थानीय लोगों के लिए गर्व का स्रोत बनेगा और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को मान्यता देगा।
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