उत्तर प्रदेश की 'एक जिला एक व्यंजन' योजना में मांसाहारी व्यंजन नहीं शामिल
'एक जिला एक व्यंजन' की सूची में मांसाहारी स्वाद शामिल नहीं, कबाब-बिरयानी को अभी इंतजार
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उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला एक व्यंजन' योजना में मांसाहारी व्यंजन शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे बहस छिड़ गई है। एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने कहा कि पहले चरण में केवल चयनित व्यंजनों को शामिल किया गया है। योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।
- 01मांसाहारी व्यंजन 'एक जिला एक व्यंजन' योजना में शामिल नहीं हैं।
- 02पहले चरण में केवल चयनित व्यंजनों को ही जगह मिली है।
- 03लखनऊ के कबाब और बिरयानी जैसे प्रसिद्ध व्यंजन सूची से बाहर हैं।
- 04सरकार ने योजना के लिए ₹150 करोड़ का बजट निर्धारित किया है।
- 05योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यंजनों को पहचान दिलाना है।
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उत्तर प्रदेश की 'एक जिला एक व्यंजन' योजना में मांसाहारी व्यंजनों को शामिल नहीं किया गया है, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ है। एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि पहले चरण में केवल जिला स्तरीय समिति द्वारा चयनित व्यंजन ही शामिल किए गए हैं। इस योजना के तहत प्रदेश के कई प्रसिद्ध मांसाहारी व्यंजन जैसे लखनऊ के गलावटी कबाब और बिरयानी, रामपुर का मटन कोरमा, और बरेली का मटन पकवान शामिल नहीं हैं। इसके बजाय, शाकाहारी और मिठाई आधारित व्यंजनों को प्राथमिकता दी गई है, जैसे आगरा का पेठा और मथुरा का पेड़ा। सरकार का कहना है कि यह पहल पारंपरिक व्यंजनों की पहचान को बढ़ावा देने के लिए है, जिससे उन्हें गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना को स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को समर्थन देने वाला बताया है। योजना के लिए सरकार ने ₹150 करोड़ का बजट निर्धारित किया है और इसे आगे बढ़ाने की योजना है।
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इस योजना से स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को समर्थन मिलेगा, जिससे उनकी आय में सुधार हो सकता है।
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