भारत और यूएई के बीच हुआ ऐतिहासिक तेल भंडारण समझौता
ना होर्मुज का जोखिम, ना युद्ध का असर...यूएई से हुआ ये समझौता बदल देगा सीन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त अरब अमीरात दौरे के दौरान भारत और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत, यूएई भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगा, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा।
- 01भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे यह समझौता महत्वपूर्ण है।
- 02भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में वर्तमान में 3.9 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है।
- 03यूएई का कच्चा तेल भारत के भूमिगत भंडारों में स्टोर किया जाएगा, जिससे संकट के समय त्वरित उपयोग संभव होगा।
- 04इस समझौते का उद्देश्य ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है।
- 05भारत में तेल की दैनिक डिमांड 60 लाख बैरल है, जिससे यह भंडारण महत्वपूर्ण हो जाता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दौरे के दौरान, भारत ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, यूएई भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगा। यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। समझौते के अनुसार, यूएई का कच्चा तेल भारत के भूमिगत भंडारों में स्टोर किया जाएगा, जिससे संकट के समय भारत तुरंत इसका उपयोग कर सकेगा। वर्तमान में भारत के पास 3.9 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है, जिसमें विशाखापट्टनम, मैंगलोर और पादुर शामिल हैं। भविष्य में, भारत की कुल क्षमता बढ़कर 7.8 करोड़ बैरल होने की उम्मीद है। यह समझौता भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करेगा।
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यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाएगा और संकट के समय त्वरित तेल आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
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