बिरयानी, पिज्जा-बर्गर पर भी महंगाई की मार; पेट्रोल-डीजल रेट बढ़ने से कितने महंगे हो जाएंगे रेस्टोरेंट और ऑनलाइन फूड ऑर्डर
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नई दिल्ली। अगर आप भी वीकेंड पर अपनी पसंदीदा बिरयानी, बर्गर या पिज्जा ऑर्डर करने का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी जेब थोड़ी ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। भारत के रेस्टोरेंट और डिलीवरी एप अगले हफ्ते से खाने-पीने की चीजों को 5-10% तक महंगा करने की तैयारी में हैं। एलपीजी (LPG) की कमी, गैस की बढ़ती कीमतों और स्टाफ की कमी से जूझ रही फूड इंडस्ट्री के लिए हाल ही में बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम 'कोढ़ में खाज' का काम कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि इस महंगाई का आपकी थाली और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर क्या और कितना असर पड़ने वाला है। 5 से 10 फीसदी तक महंगा हो जाएगा आपका पसंदीदा खाना? एलपीजी सप्लाई की चिंताओं से पहले ही परेशान फूड इंडस्ट्री अब एक और बड़े झटके की तैयारी कर रही है। शुक्रवार को सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के बाद, अगले हफ्ते से खाने के दाम 5-10% तक बढ़ने की आशंका है। आमतौर पर, रेस्टोरेंट व्यवसाय हर साल सितंबर के आसपास अपनी कीमतों में बदलाव करते हैं। लेकिन नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के चेयरमैन और 'वाओ! मोमो' (Wow! Momo) के को-फाउंडर सागर दरयानी के अनुसार, इस साल हमारे पास 1 जुलाई से कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। रेस्टोरेंट और फूड चेन आखिर क्यों बढ़ा रहे हैं कीमतें? इसका सबसे बड़ा कारण इनपुट कॉस्ट (लागत मूल्य) का बढ़ना है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये और डीजल की 90.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। यह पिछले लगभग चार सालों में पहली बड़ी बढ़ोतरी है। इसके अलावा, एलपीजी की कीमतों में लगभग 60% का उछाल आ चुका है। कैफे दिल्ली हाइट्स (Cafe Delhi Heights) के फाउंडर विक्रांत बत्रा का कहना है, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से हमारे परिवहन, पैकेजिंग, कच्चा माल और इनपुट लागत में वृद्धि होगी; हमारे पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसका असर ऐसा है कि हमारे स्टाफ मेंबर्स के रहने का खर्च (Cost of living) भी बढ़ जाएगा। वहीं, अमूल और मदर डेयरी द्वारा दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने भी कच्चे माल की लागत को और बढ़ा दिया है। ईरान युद्ध भी है इस महंगाई की वजह अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालात का सीधा असर आपकी थाली पर पड़ रहा है। मिडिल-ईस्ट में 75 दिनों से ज्यादा समय से चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के बाद, तेहरान ने वैश्विक तेल के प्रमुख मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर भी पड़ेगा सीधा असर डिलीवरी कंपनियों के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने के कारण ग्राहकों को अब ज्यादा डिलीवरी फीस चुकानी पड़ सकती है। इसके अलावा, मिलने वाले डिस्काउंट कम हो सकते हैं और न्यूनतम ऑर्डर वैल्यू को भी बढ़ाया जा सकता है। इंडस्ट्री के दिग्गजों को यह भी डर है कि जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म अपने कमीशन या चैनल पार्टनर फीस में बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे रेस्टोरेंट्स का मार्जिन और भी कम हो जाएगा। यह भी पढ़ें- Petrol-Diesel की बढ़ती कीमतों के खिलाफ गिग वर्कर्स का हल्ला बोल, दोपहर 12 से शाम 5 तक देशव्यापी हड़ताल
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