आरबीआई ने अन रेटेड लोन पर जोखिम भार सीमा बढ़ाई
आरबीआई का बड़ा फैसला: अन रेटेड लोन पर 150% जोखिम भार की सीमा अब ₹500 करोड़ हुई
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अन रेटेड लोन पर 150% जोखिम भार की सीमा को ₹200 करोड़ से बढ़ाकर ₹500 करोड़ कर दिया है। यह बदलाव 1 अप्रैल, 2027 से लागू होगा और इसका उद्देश्य क्रेडिट जोखिम के लिए पूंजी प्रभार को बेहतर बनाना है।
- 01अन रेटेड लोन पर जोखिम भार सीमा ₹500 करोड़ तक बढ़ाई गई।
- 02यह बदलाव 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी होगा।
- 03दीर्घकालिक और अल्पकालिक एक्सपोजर के लिए अलग-अलग जोखिम भार निर्धारित किए गए हैं।
- 04आरबीआई ने उच्च जोखिम भार की आवश्यकता को वापस लिया है।
- 05विदेशी बैंक शाखाओं के लिए बाहरी क्रेडिट रेटिंग का उपयोग किया जा सकेगा।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अन रेटेड ऋण पर 150% जोखिम भार की सीमा को ₹200 करोड़ से बढ़ाकर ₹500 करोड़ कर दिया है। यह निर्णय 1 अप्रैल, 2027 से लागू होगा और इसका उद्देश्य क्रेडिट जोखिम के लिए बेसल 3 पूंजी प्रभार को बेहतर बनाना है। पहले, आरबीआई ने अन रेटेड एक्सपोजर पर उच्च जोखिम भार के लिए 200 करोड़ रुपये की निचली सीमा का प्रस्ताव दिया था। अब, दीर्घकालिक एक्सपोजर के लिए 100% और अल्पकालिक एक्सपोजर के लिए 50% का समान जोखिम भार निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, आरबीआई ने उन एक्सपोजर के लिए उच्च जोखिम भार की आवश्यकता को वापस ले लिया है, जो पहले रेटेड थे लेकिन बाद में अन रेटेड हो गए। विदेशी बैंक शाखाओं के मामले में जोखिम भार की गणना के लिए मूल बैंक की बाहरी क्रेडिट रेटिंग का उपयोग किया जा सकता है।
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यह बदलाव कॉर्पोरेट्स और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए वित्तीय जोखिम को कम करेगा, जिससे वे अधिक सुरक्षित ऋण प्रदान कर सकेंगे।
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