भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल 20% बढ़ने का अनुमान, पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव
पश्चिम एशिया संकट का बड़ा असर: भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल 20% बढ़ने का अनुमान
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पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत के उर्वरक सब्सिडी बिल में वित्त वर्ष 2027 में 20% की बढ़ोतरी होने की संभावना है। उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यूरिया और अन्य उर्वरकों के आयात के कारण सब्सिडी बढ़ेगी। सरकार ने पहले ही वित्त वर्ष 2027 के लिए 1,70,781 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया था।
- 01पश्चिम एशिया संकट के चलते भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल बढ़ने की संभावना है।
- 02वित्त वर्ष 2027 में सब्सिडी बिल 20% बढ़ने का अनुमान।
- 03भारत ने खरीफ सीजन में उच्च दाम पर उर्वरकों का आयात किया है।
- 04यूरिया की खुदरा कीमतें स्थिर रहेंगी, लेकिन सब्सिडी बढ़ेगी।
- 05सरकार ने पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर आश्वासन दिया है।
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पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत के उर्वरक सब्सिडी बिल में वित्त वर्ष 2027 में 20% की बढ़ोतरी का अनुमान है। उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि भारत ने खरीफ सीजन में 64 लाख टन यूरिया और 19 लाख टन अन्य उर्वरकों का आयात किया है, जिससे सब्सिडी बढ़ने की संभावना है। पहले से ही, वित्त वर्ष 2027 के लिए उर्वरक सब्सिडी का अनुमान 1,70,781 करोड़ रुपये रखा गया था, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान से 8.40% कम है। यूरिया की कीमतें स्थिर रहेंगी, जबकि सरकार ने घरेलू उत्पादन और मांग का आकलन करने के बाद आगे के आयात के निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। साथ ही, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की स्थिति पर भी सरकार ने चिंता जताई है। आंध्र प्रदेश में ईंधन की कमी के कारण लंबी कतारें देखने को मिलीं, लेकिन सरकार ने आश्वासन दिया है कि सभी खुदरा आउटलेट्स पर स्टॉक पहुंच जाएगा।
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उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों पर पड़ेगा, जिससे उनकी लागत बढ़ सकती है।
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