भारत की कूटनीतिक चुनौती: ब्रिक्स और क्वाड की मेज़बानी
ब्रिक्स-क्वाड की मेजबानी और ये भी कमाल, भारत के लिए बारूदी सुरंग वाली मई कहने वाले नतमस्तक होंगे
Image: Nbt Navbharattimes
भारत ने मई 2023 में ब्रिक्स और क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की मेज़बानी की, जो उसकी कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है। ब्रिक्स चीन और रूस सहित 11 देशों का समूह है, जबकि क्वाड अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का गठबंधन है। इस स्थिति ने भारत के लिए कई अवसर और चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं।
- 01भारत ने 14 मई को ब्रिक्स और 26 मई को क्वाड के विदेश मंत्रियों की मेज़बानी की।
- 02ब्रिक्स और क्वाड के देश दो विपरीत ध्रुवों पर खड़े हैं, जिससे भारत की कूटनीतिक स्थिति जटिल हो गई है।
- 03भारत ने ईरान के आग्रह के बावजूद अमेरिका की निंदा नहीं की, जिससे उसके कूटनीतिक संतुलन पर असर पड़ा।
- 04क्वाड की बैठक में कोई शिखर सम्मेलन की घोषणा नहीं हुई, जिससे इसके प्रभाव में कमी की आशंका है।
- 05भारत को इन बैठकों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी नेतृत्व क्षमता और प्रतिष्ठा बढ़ाने का अवसर मिला।
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भारत ने मई 2023 में ब्रिक्स और क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की मेज़बानी की, जो उसकी कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है। 14 मई को ब्रिक्स की बैठक में चीन और रूस जैसे देशों की उपस्थिति थी, जबकि 26 मई को क्वाड की बैठक में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हुए। यह स्थिति भारत के लिए कूटनीतिक चुनौतियों और अवसरों का मिश्रण प्रस्तुत करती है। ब्रिक्स के सदस्य देशों की अमेरिका के प्रति भिन्नता और ईरान के आग्रह पर भारत का अमेरिका की निंदा न करना, कूटनीतिक संतुलन को दर्शाता है। क्वाड की बैठक में शिखर सम्मेलन की घोषणा न होना, इसके प्रभाव को कम कर सकता है। हालांकि, भारत को इन बैठकों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी नेतृत्व क्षमता और प्रतिष्ठा बढ़ाने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता है।
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भारत की कूटनीतिक गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है।
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