किसानों और अधिवक्ताओं का हंगामा: चकबंदी कार्यालय में भूमि विवाद पर तीखी बहस
Moradabad News: चकबंदी कार्यालय में अधिवक्ता और किसानों ने किया हंगामा

Image: Amar Ujala
ठाकुरद्वारा, उत्तर प्रदेश में चकबंदी कार्यालय में किसानों और अधिवक्ताओं ने भूमि संबंधी मामलों में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। यह हंगामा तब शुरू हुआ जब अधिवक्ता सत्यवीर सिंह ने एक पक्षीय आदेश का विरोध किया, जिसके बाद चकबंदी अधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया।
- 01अधिवक्ता और किसानों ने चकबंदी अधिकारी पर भूमि मामलों में लापरवाही और पैसे मांगने का आरोप लगाया।
- 02गांव कांकरखेड़ा के प्रधान फिरासत हुसैन ने बताया कि दो साल से विरासत दर्ज नहीं हुई है।
- 03अहमद हसन ने आरोप लगाया कि कार्यालय के एक कर्मचारी ने विरासत दर्ज करने के लिए ₹1500 लिए थे।
- 04चकबंदी अधिकारी ने एक पक्षीय आदेश के मामले में जांच का आश्वासन दिया।
- 05हंगामे के दौरान चकबंदी अधिकारी ने अधिवक्ता की फाइल मंगवाई, जिसमें एक अन्य व्यक्ति के तामील में हस्ताक्षर मिले।
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ठाकुरद्वारा, उत्तर प्रदेश में चकबंदी कार्यालय में मंगलवार को किसानों और अधिवक्ताओं के बीच भूमि विवाद को लेकर हंगामा हुआ। अधिवक्ता सत्यवीर सिंह और किसानों ने चकबंदी अधिकारी विनय कुमार श्रीवास्तव पर आरोप लगाया कि वह भूमि संबंधी मामलों में लापरवाह हैं और पैसे मांगते हैं। हंगामा तब बढ़ा जब अधिवक्ता ने एक पक्षीय आदेश का विरोध किया, जिसमें बिना नोटिस दिए निर्णय लिया गया था। गांव कांकरखेड़ा के प्रधान फिरासत हुसैन ने बताया कि उनके गांव के अली हसन और इबले हसन के पिता की दो साल पहले मृत्यु हो गई थी, लेकिन उनकी विरासत अभी तक दर्ज नहीं की गई है। इसके अलावा, अहमद हसन ने आरोप लगाया कि एक कर्मचारी ने विरासत दर्ज करने के लिए ₹1500 लिए थे, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। चकबंदी अधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया और कहा कि उन्होंने किसी आदेश पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, केवल एक पक्षीय कार्रवाई के लिए लिखा था। इस पर हंगामा शांत हुआ।
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यह विवाद स्थानीय किसानों के लिए भूमि अधिकारों और विरासत के मुद्दों को प्रभावित कर सकता है।
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