चीन ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अमेरिका को दी पटखनी, हुवावे ने पेश की नई चिप तकनीक
चीन ने अमेरिका को दी 'पटखनी', बैन के बावजूद ड्रैगन ने खोजा ऐसा जुगाड़ कि 5 साल में ऐसे पलटेगा चिप का खेल

Image: Jagran
चीन की कंपनी हुवावे ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद अगले 5 वर्षों में 1.4-नैनोमीटर चिप्स बनाने का लक्ष्य रखा है। यह तकनीक दुनिया की सबसे आधुनिक चिप-मेकिंग प्रक्रिया मानी जा रही है। हुवावे ने 'ताऊ स्केलिंग लॉ' सिद्धांत का उपयोग करके चिप्स का विकास किया है, जिससे वह अमेरिकी तकनीक पर निर्भरता कम कर रही है।
- 01हुवावे ने 1.4-नैनोमीटर चिप्स बनाने का लक्ष्य रखा है, जो इस दशक के अंत तक सबसे उन्नत मानी जाएगी।
- 02चिप्स को बेहतर बनाने के लिए हुवावे ने 'ताऊ स्केलिंग लॉ' सिद्धांत पेश किया है।
- 032019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद हुवावे ने 'एक्सट्रीम सर्वाइवल मोड' में काम करना शुरू किया।
- 04हुवावे के Mate 60 सीरीज स्मार्टफोन में 7-nm तकनीक की चिप का उपयोग किया गया है।
- 05चीन के चिप मार्केट में स्वदेशीकरण से भारत को संभावित लाभ मिल सकता है।
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चीन की प्रमुख टेक कंपनी हुवावे ने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। कंपनी ने अगले 5 वर्षों में 1.4-नैनोमीटर (nm) चिप्स बनाने का लक्ष्य रखा है, जो इस दशक के अंत तक सबसे उन्नत चिप तकनीक मानी जाएगी। हुवावे ने 'ताऊ स्केलिंग लॉ' नामक एक नया सिद्धांत पेश किया है, जिससे वह चिप्स के विकास में अमेरिकी तकनीक पर निर्भरता को कम कर रही है। 2019 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के बाद, हुवावे ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक सीक्रेट बैकअप चिप प्रोजेक्ट शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप, 2023 में कंपनी ने 5G-सक्षम Mate 60 सीरीज स्मार्टफोन के साथ बाजार में वापसी की। हुवावे की चिप्स की मांग में वृद्धि हो रही है, क्योंकि घरेलू टेक कंपनियां अमेरिकी कंपनी एनवीडिया के विकल्प तलाश रही हैं। इस स्थिति से भारत को भी लाभ हो सकता है, क्योंकि वैश्विक टेक कंपनियां अब भारत को एक संभावित रिसर्च और डेवलपमेंट हब के रूप में देख रही हैं।
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हुवावे की नई चिप तकनीक से भारत को चीन के विकल्प के रूप में एक बड़ा उपभोक्ता बाजार और रिसर्च एंड डेवलपमेंट हब बनने का अवसर मिल सकता है।
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