गायों में थेलेरियोसिस का खतरा: जानें लक्षण और बचाव के उपाय
गायों में थेलेरियोसिस का खतरा, किलनी-चमकोन से फैलती है ये जानलेवा बीमारी, जानें बचाव के उपाय

Image: News 18 Hindi
बोकारो के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने थेलेरियोसिस नामक खतरनाक बीमारी के बारे में बताया है, जो गायों को प्रभावित करती है। यह बीमारी रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और एक गाय से दूसरी गाय में फैल सकती है।
- 01थेलेरियोसिस गायों के लिए अत्यंत खतरनाक है और यह एक गाय से अन्य गायों में फैल सकती है।
- 02संक्रमित गायों में तेज बुखार, दूध उत्पादन में कमी, और आंखों व कानों में सूजन के लक्षण देखे जा सकते हैं।
- 03गौशाला में साफ-सफाई का ध्यान रखना और किलनी-चमकोन नियंत्रित करने वाली दवाओं का उपयोग आवश्यक है।
- 04पशुओं को नियमित रूप से नहलाना और हर महीने स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है।
- 05समय पर टीकाकरण से इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।
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बोकारो के चास स्थित पेट क्लिनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने गायों में थेलेरियोसिस नामक जानलेवा बीमारी के बारे में चेतावनी दी है। यह बीमारी रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करती है और एक संक्रमित गाय से अन्य गायों में फैल सकती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, जो 104 से 107 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, दूध उत्पादन में गिरावट, और आंखों व कानों में सूजन शामिल हैं। डॉ. कुमार ने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए गौशाला की साफ-सफाई पर ध्यान देना आवश्यक है। नियमित रूप से किलनी और चमकोन नियंत्रित करने वाली दवाओं का उपयोग करना, पशुओं को समय-समय पर नहलाना, और हर महीने स्वास्थ्य जांच कराना भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, समय पर टीकाकरण से इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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गायों में थेलेरियोसिस के बढ़ते मामलों से स्थानीय पशुपालकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
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