BJP नेता के वर्चुअल बकरीद सुझाव पर मौलाना का तीखा जवाब
इस्लाम प्रैक्टिकल धर्म है वर्चुअल नहीं, ऑनलाइन बकरीद मनाने के सुझाव पर BJP नेता को मौलाना का फटकार

Image: Zee News
भारतीय जनता पार्टी के नेता नितेश राणे द्वारा वर्चुअल बकरीद मनाने के सुझाव पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस्लाम प्रैक्टिकल धर्म है और वर्चुअल कुर्बानी का कोई स्थान नहीं है। राणे के मदरसों पर किए गए आरोपों का भी मौलाना ने खंडन किया।
- 01नितेश राणे ने मुसलमानों को वर्चुअल कुर्बानी करने का सुझाव दिया था।
- 02मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लाम वर्चुअल धर्म नहीं है, बल्कि प्रैक्टिकल है।
- 03राणे ने मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताया, जिसे मौलाना ने गलत ठहराया।
- 04मौलाना ने मदरसों के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
- 05उन्होंने 1857 से 1947 तक के स्वतंत्रता आंदोलनों में मदरसों के उलेमा की शहादत का उल्लेख किया।
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भारतीय जनता पार्टी के नेता नितेश राणे ने बकरीद पर वर्चुअल कुर्बानी करने का सुझाव दिया, जिस पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। मौलाना ने स्पष्ट किया कि इस्लाम एक प्रैक्टिकल धर्म है और वर्चुअल कुर्बानी का कोई आधार नहीं है। उन्होंने राणे पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्होंने इस्लाम का सही ज्ञान प्राप्त किया होता, तो वे ऐसा सुझाव नहीं देते। इसके अलावा, राणे ने मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताया, जिस पर मौलाना ने कहा कि उन्हें पहले मदरसों का इतिहास पढ़ना चाहिए। मौलाना ने स्वतंत्रता संग्राम में मदरसों के उलेमा की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया, यह बताते हुए कि 55 हजार उलेमाओं ने देश की आजादी के लिए शहादत दी। उन्होंने कहा कि आज कुछ संप्रदायिक शक्तियाँ मदरसों को आतंकवाद का केंद्र बताने का प्रयास कर रही हैं, जो निंदनीय है।
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यह विवाद इस्लामिक समुदाय और राजनीतिक नेताओं के बीच तनाव को बढ़ा सकता है, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित हो सकती है।
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