आब-ए-जमजम: इस्लाम में पवित्र जल का महत्व और इसकी विशेषताएँ
Zamzam Water: आब-ए-जमजम क्या है? मुसलमान क्यों मानते हैं इसे अल्लाह का तोहफा, जानें इसकी खासियत
Image: Nbt Navbharattimes
आब-ए-जमजम, इस्लाम में एक पवित्र जल स्रोत है, जिसे अल्लाह का तोहफा माना जाता है। यह कुआं लगभग 4,000 वर्ष पुराना है और मक्का के अल-हरम मस्जिद में स्थित है। इसके पानी की विशेषताएँ इसे अद्वितीय बनाती हैं, जैसे कि इसका कभी सूखना या खराब न होना।
- 01आब-ए-जमजम का अर्थ है 'रुक-रुक कर बहने वाला पानी', जो हज़रत इब्राहीम की पत्नी हजरत हाजरा से जुड़ी एक कथा से प्रेरित है।
- 02यह कुआं सऊदी अरब के मक्का में स्थित है और इसकी उम्र लगभग 4,000 वर्ष है।
- 03इस्लाम में इसे केवल पानी नहीं, बल्कि बरकत और शिफा का प्रतीक माना जाता है।
- 04हर साल लाखों लोग हज और उमराह के दौरान इस पानी का सेवन करते हैं और इसे अपने घर ले जाते हैं।
- 05आब-ए-जमजम का जलस्तर कभी कम नहीं हुआ और न ही इसका पानी खराब हुआ है, जिससे इसे अल्लाह का अनमोल तोहफा माना जाता है।
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आब-ए-जमजम इस्लाम धर्म में एक अत्यंत पवित्र जल स्रोत है, जिसे अल्लाह का तोहफा माना जाता है। इसका नाम 'जमजम' हज़रत हाजरा द्वारा पानी की खोज के दौरान 'जम-जम' कहने से आया है। यह कुआं सऊदी अरब के मक्का में स्थित है और इसकी उम्र लगभग 4,000 वर्ष है। इस जल का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे केवल पानी नहीं, बल्कि बरकत और शिफा का प्रतीक माना जाता है। हज़रत इब्राहीम ने अपनी पत्नी हजरत हाजरा और बेटे हजरत इस्माइल को मक्का के रेगिस्तान में छोड़ दिया था, जहाँ पानी की खोज में हजरत हाजरा ने इस कुएं का पानी पाया। लाखों मुसलमान हर साल हज और उमराह के दौरान इस पानी का सेवन करते हैं और इसे अपने साथ घर ले जाते हैं। इस जल का स्तर कभी कम नहीं हुआ और न ही इसकी गुणवत्ता में कोई कमी आई है, जिससे यह अल्लाह का अनमोल तोहफा बना हुआ है।
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आब-ए-जमजम का पानी हज और उमराह के दौरान लाखों मुसलमानों के लिए उपलब्ध होता है, जो इसे अपने साथ घर ले जाते हैं।
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