भारत में परीक्षा लीक के कारण होने वाले नुकसान का आकलन
एक पेपर कराने में सरकार को कितनी मशक्कत करनी पड़ती है? लीक होने पर कितना झेलना पड़ता है नुकसान
Zee News
Image: Zee News
भारत में NEET, JEE, SSC और UPSC जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने पर सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। एक पेपर के लिए लाखों रुपये खर्च होते हैं, और लीक होने पर दोबारा परीक्षा कराने में ₹200-500 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है।
- 01परीक्षा पेपर बनाने की प्रक्रिया अत्यधिक गोपनीय और जटिल है।
- 02NTA ने 2018 से अब तक परीक्षाओं पर ₹3,064 करोड़ खर्च किए हैं।
- 03पेपर लीक होने पर दोबारा परीक्षा कराने में ₹200-500 करोड़ का नुकसान हो सकता है।
- 04छात्रों को भी दोबारा तैयारी करनी पड़ती है, जिससे उनका समय बर्बाद होता है।
- 05सुरक्षा इंतजामों के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं चिंता का विषय हैं।
Advertisement
In-Article Ad
भारत में NEET, JEE, SSC और UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर तैयार करने की प्रक्रिया बेहद गोपनीय और जटिल होती है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) जैसे संगठनों को इन परीक्षाओं को आयोजित करने में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। NTA ने 2018 से अब तक परीक्षाओं पर ₹3,064 करोड़ खर्च किए हैं, जिसमें प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और स्टाफ वेतन शामिल हैं। यदि किसी परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है, तो पूरी प्रक्रिया को दोहराना पड़ता है, जिससे ₹200-500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, छात्रों को भी दोबारा तैयारी करनी पड़ती है, जिससे उनका समय बर्बाद होता है और भर्ती प्रक्रिया में देरी होती है। इस प्रकार, परीक्षा लीक की घटनाएं न केवल सरकार के लिए बल्कि छात्रों के लिए भी गंभीर समस्याएं उत्पन्न करती हैं।
Advertisement
In-Article Ad
परीक्षा लीक के कारण छात्रों को दोबारा तैयारी करनी पड़ती है, जिससे उनका समय और संसाधन बर्बाद होता है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि परीक्षा लीक की घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े कदम उठाने चाहिए?
Connecting to poll...
More about National Testing Agency
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




