लखनऊ में सीएनजी पंपों की कमी से डीजल-पेट्रोल की खपत में कमी मुश्किल
लखनऊ की बड़ी आबादी में 15 वर्ष में सिर्फ 47 सीएनजी पंप, डीजल-पेट्रोल की खपत कम होना काफी मुश्किल
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लखनऊ में पिछले 15 वर्षों में केवल 47 सीएनजी पंप स्थापित हुए हैं, जिससे डीजल और पेट्रोल की खपत कम करने में कठिनाई हो रही है। सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधाओं की कमी के कारण लोग वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों को अपनाने से हिचकिचा रहे हैं।
- 01लखनऊ में सीएनजी की आपूर्ति 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन अब तक केवल 47 पंप स्थापित हुए हैं।
- 02ग्रीन गैस कंपनी ने केवल सात मदर स्टेशन खोले हैं, जिससे सीएनजी की उपलब्धता सीमित है।
- 03जटिल एनओसी प्रक्रिया के कारण पंपों की स्थापना में देरी हो रही है।
- 04सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन गैस की उपलब्धता में कमी है।
- 05इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग नेटवर्क भी पर्याप्त नहीं है, जिससे लोग इन्हें खरीदने से कतराते हैं।
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लखनऊ में सीएनजी पंपों की संख्या में कमी के कारण डीजल और पेट्रोल की खपत को कम करने में कठिनाई हो रही है। पिछले 15 वर्षों में केवल 47 सीएनजी पंप स्थापित किए गए हैं, जबकि ग्रीन गैस कंपनी ने 2010 में सीएनजी की आपूर्ति शुरू की थी। इस कंपनी ने अब तक केवल 7 मदर स्टेशन खोले हैं, जिससे शहर में सीएनजी की उपलब्धता सीमित है। एक अधिकारी के अनुसार, कंपनी की लापरवाही और एनओसी (अनुमति) प्रक्रिया की जटिलता के कारण पंपों की स्थापना में देरी हो रही है। उदाहरण के लिए, दुबग्गा पंप के लिए एनओसी लेने में 5 वर्ष से अधिक का समय लग गया। इसके अलावा, सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ने के बावजूद गैस की उपलब्धता नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग नेटवर्क भी पर्याप्त नहीं है, जिससे लोग इन्हें खरीदने से हिचकिचा रहे हैं। कंपनियों का दावा था कि चार्जिंग सुविधाएं हर 2-3 किलोमीटर पर उपलब्ध होंगी, लेकिन इस दिशा में भी प्रगति धीमी है।
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सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की कमी से नागरिकों को डीजल और पेट्रोल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे प्रदूषण और ईंधन की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
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