पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: SIR विवाद और तृणमूल कांग्रेस की चुनौतियाँ
ममता का ‘अंतिम दांव’? चुनाव बाद भी जारी है बंगाल SIR की अनंत-कथा
Aaj Tak
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आरोप लगाया है कि वोटर लिस्ट के विशेष इंटेंसिव रीविजन (SIR) ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया। चुनाव आयोग और बीजेपी इसे एक प्रशासनिक प्रक्रिया मानते हैं। यह विवाद अब अदालत में चल रहा है और टीएमसी के लिए अस्तित्व का संघर्ष बन गया है।
- 01टीएमसी का आरोप है कि SIR ने लाखों वोटरों को हटाया, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए।
- 02चुनाव आयोग का कहना है कि SIR एक वैध प्रशासनिक प्रक्रिया थी।
- 03सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर पर्याप्त सबूत मिले, तो मामले की अलग से सुनवाई की जा सकती है।
- 04बीजेपी का तर्क है कि SIR ने फर्जी वोटिंग नेटवर्क को समाप्त किया।
- 05आने वाले दिनों में SIR विवाद का राजनीतिक और कानूनी प्रभाव जारी रहेगा।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। बीजेपी ने पहली बार सत्ता हासिल की है, जबकि टीएमसी को विपक्ष में बैठना पड़ा है। चुनाव परिणामों के बाद, टीएमसी ने आरोप लगाया है कि वोटर लिस्ट के विशेष इंटेंसिव रीविजन (SIR) ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया। टीएमसी का कहना है कि लाखों वोटरों के नाम हटाए गए, और कई सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर से अधिक थी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और बीजेपी इसे 'सिस्टम की सफाई' मानते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई पार्टी यह साबित कर सके कि वोटरों के हटने से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए, तो अलग याचिका दाखिल की जा सकती है। यह विवाद अब अदालत में चल रहा है और टीएमसी के लिए अस्तित्व का संघर्ष बन गया है।
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यदि टीएमसी कुछ सीटों पर यह साबित कर पाती है कि हटाए गए वोटरों की संख्या और चुनावी नतीजे में सीधा संबंध था, तो यह राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है।
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