आयुष विभाग के चार राष्ट्रीय कार्यक्रमों से लोगों को मिल रहा लाभ
आयुष विभाग द्वारा संचालित हो रहे चार राष्ट्रीय कार्यक्रम, लोगों को मिल रहा लाभ

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आयुष विभाग ने चार प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों का संचालन किया है, जिनमें स्कूली बच्चों, गर्भवती माताओं, नवजात शिशुओं और असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों को आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं देखभाल की सुविधा प्रदान की जा रही है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्वास्थ्य में सुधार और जागरूकता बढ़ाना है।
- 01राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम ‘आयुर्विद्या’ के तहत स्कूली बच्चों में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
- 02सुप्रजा कार्यक्रम गर्भवती माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल हेतु आयुर्वेदिक सेवाएं प्रदान करता है।
- 03कारूण्य-पैलिएटिव केयर कार्यक्रम जीवन-घातक बीमारियों से जूझ रहे रोगियों की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक समस्याओं को संबोधित करता है।
- 04ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर कार्यक्रम जोड़ों और मांसपेशियों की समस्याओं का प्रबंधन करता है।
- 05आयुष विभाग द्वारा शिविरों और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से इन कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
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आयुष विभाग द्वारा चार प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य विभिन्न समूहों को आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं देखभाल की सुविधाएं प्रदान करना है। ‘आयुर्विद्या’ कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य जांच और योग प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ‘सुप्रजा’ कार्यक्रम गर्भवती माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए आयुर्वेदिक सेवाएं प्रदान करता है। इसके अलावा, ‘कारूण्य-पैलिएटिव केयर’ कार्यक्रम गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों की समस्याओं का समाधान करता है, जबकि ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर कार्यक्रम जोड़ों और मांसपेशियों की समस्याओं का प्रबंधन करता है। आयुष विभाग इन कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार शिविरों और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से कर रहा है।
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इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा और देखभाल की सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
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