ऑपरेशन सिंदूर की याद में भावुक हुए बलवान सिंह सिंधु
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र आते ही जांबाज पोते की यादें हो जाती हैं ताजा : बलवान
Amar Ujala
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रोहतक, हरियाणा के बलवान सिंह सिंधु (80) ने अपने पोते स्क्वाड्रन लीडर लोकेन्दर सिंधु को याद किया, जो ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थे और बाद में एक विमान दुर्घटना में शहीद हो गए। बलवान ने अपने पोते की बहादुरी और साहस की कहानियाँ साझा कीं।
- 01बलवान सिंह सिंधु ने अपने पोते लोकेन्दर की बहादुरी को याद किया।
- 02लोकेन्दर सिंधु ऑपरेशन सिंदूर में शामिल थे और बाद में एक विमान दुर्घटना में शहीद हो गए।
- 03बलवान ने अपने पोते को सेना में भेजने का निर्णय लिया था।
- 04लोकेन्दर ने मधुमक्खियों के हमले के बावजूद साहस नहीं खोया।
- 05दादा-पोते के बीच का संबंध और प्रशिक्षण की कहानियाँ भावुक हैं।
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रोहतक, हरियाणा के बलवान सिंह सिंधु (80) ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए अपने पोते स्क्वाड्रन लीडर लोकेन्दर सिंधु को याद किया, जो इस ऑपरेशन का हिस्सा थे और बाद में एक विमान दुर्घटना में बलिदान हो गए। बलवान ने अपने पोते की बहादुरी और साहस की कई कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे लोकेन्दर को सेना में भेजने का निर्णय लिया गया और उन्होंने अपने पोते को साइकिल और मोटरसाइकिल चलाना सिखाया। बलवान ने यह भी बताया कि जब लोकेन्दर 16 साल के थे, तब मधुमक्खियों के हमले के बावजूद वे घबराए नहीं और समय पर अस्पताल पहुँचने में सफल रहे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लोकेन्दर ने अपने दादा को बताया था कि उनकी ड्यूटी एयर स्ट्राइक के समय होती है।
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