गोरखा रेजिमेंट: भारतीय सेना की बहादुरी का प्रतीक
Balen Shah Nepal Gorkhas: 'वो गोरखा है मौत से नहीं डरता'...कारगिल में पाकिस्तान के छुड़ाए पसीने, बालेन शाह के नेपाल के 40,000 बहादुर इंडियन आर्मी में
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गोरखा रेजिमेंट, जो नेपाल के गोरखा क्षेत्र से आती है, भारतीय सेना में अपनी अदम्य बहादुरी और अनुशासन के लिए जानी जाती है। ये सैनिक विभिन्न युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, जिसमें कारगिल युद्ध भी शामिल है। वर्तमान में, गोरखा सैनिकों की भर्ती प्रक्रिया में परिवर्तन आया है, जिससे उनकी संख्या में कमी आई है।
- 01गोरखा रेजिमेंट भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण इन्फैंट्री रेजिमेंट है।
- 02गोरखाओं की बहादुरी ने उन्हें कई युद्धों में महत्वपूर्ण बना दिया है।
- 03गोरखा सैनिकों की भर्ती प्रक्रिया में हालिया बदलाव हुए हैं।
- 04गोरखा रेजिमेंट ने कई वीरता पुरस्कार जीते हैं, जिनमें परमवीर चक्र शामिल है।
- 05गोरखा रेजिमेंट का गठन ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1815 में किया था।
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गोरखा रेजिमेंट, जो नेपाल के गोरखा क्षेत्र से आती है, भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण इन्फैंट्री रेजिमेंट है। इसे 24 अप्रैल 1815 को ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा स्थापित किया गया था। गोरखा सैनिकों ने भारत, ब्रिटेन और नेपाल की सेनाओं में अदम्य बहादुरी दिखाई है, विशेषकर कारगिल युद्ध में, जहां उन्होंने दुश्मनों को पराजित किया। गोरखा रेजिमेंट के सैनिकों की संख्या वर्तमान में लगभग 32,000 से 40,000 के बीच है। गोरखाओं ने कई युद्धों में भाग लिया है, जिसमें प्रथम विश्वयुद्ध और विभिन्न भारत-पाक युद्ध शामिल हैं। गोरखा सैनिकों की भर्ती प्रक्रिया में हाल के वर्षों में बदलाव आया है, जिससे नए गोरखाओं की भर्ती में कमी आई है। गोरखा रेजिमेंट ने कई वीरता पुरस्कार जीते हैं, जिनमें परमवीर चक्र और महावीर चक्र शामिल हैं।
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गोरखा रेजिमेंट की भर्ती प्रक्रिया में कमी से भारतीय सेना की संरचना और गोरखा समुदाय की भागीदारी पर प्रभाव पड़ सकता है।
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