डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने जागरण एजुकेशन कॉन्क्लेव में भारत की वैचारिक लड़ाई पर जोर दिया
'आजादी की लड़ाई से बड़ी है वैचारिक लड़ाई', जागरण एजुकेशन कॉन्क्लेव में बोले सुधांशु त्रिवेदी

Image: Jagran
जागरण एजुकेशन कॉन्क्लेव में भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने भारत की वैचारिक लड़ाई को आजादी की लड़ाई से बड़ा बताया। उन्होंने 'एम' फैक्टर के प्रभाव पर चर्चा की, जो भारतीय ज्ञान परंपरा को कमजोर करता है। त्रिवेदी ने भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए शिक्षा नीति में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
- 01डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि भारत पहले भी विश्वगुरु था और आज भी है, लेकिन 'एम' फैक्टर ने आत्मविश्वास को कमजोर किया है।
- 02उन्होंने 2035 तक मैकाले के प्रभाव से बाहर आने की आवश्यकता पर बल दिया।
- 03त्रिवेदी ने भारतीय वैज्ञानिकों जैसे सीवी रमन और जेसी बोस की उपलब्धियों को मान्यता न मिलने का उदाहरण दिया।
- 04उन्होंने कहा कि सप्ताह के दिनों का क्रम वैदिक ज्योतिष पर आधारित है, जो आज भी मान्यता प्राप्त है।
- 05त्रिवेदी ने स्वतंत्रता के बाद की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता क्रमिक रूप से आई।
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जागरण एजुकेशन कॉन्क्लेव में भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने भारत की वैचारिक लड़ाई को आजादी की लड़ाई से भी बड़ा बताया। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी विश्वगुरु था और आज भी है, लेकिन 'एम' फैक्टर, जो 19वीं सदी में मैकाले के प्रभाव से शुरू हुआ, ने भारतीय आत्मविश्वास को कमजोर किया है। त्रिवेदी ने 2035 तक इस प्रभाव से बाहर आने का संकल्प लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी मान्यता की कमी एक बड़ी समस्या है। त्रिवेदी ने वैदिक ज्योतिष के आधार पर सप्ताह के दिनों के क्रम को समझाते हुए कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमाण है। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए, यह बताते हुए कि स्वतंत्रता के बाद भी कई अंग्रेजी व्यवस्थाएं बनी रहीं। इस प्रकार, उन्होंने शिक्षा नीति में बदलाव की आवश्यकता और समाज की सक्रियता पर जोर दिया।
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डॉ. त्रिवेदी की बातें भारतीय शिक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता को उजागर करती हैं, जिससे छात्रों की वैज्ञानिक सोच और आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है।
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