अमेरिका-ईरान के विवाद से प्रभावित कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
7 हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट के बाद फिर उबला कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान के बीच 12 अरब डॉलर वाले पेंच से बिगड़ी तेल की चाल
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अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम के समझौते के बाद, अमेरिका ने ईरान को 300 अरब डॉलर की आर्थिक मदद की पेशकश की। इस खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 11% की गिरावट आई, लेकिन बाद में एक मिसाइल हमले के कारण कीमतें फिर से बढ़ गईं।
- 01अमेरिका ने ईरान को 300 अरब डॉलर का फंड देने की पेशकश की है।
- 02कच्चे तेल की कीमतों में 11% की गिरावट आई, जो पिछले 7 हफ्तों में सबसे बड़ी गिरावट थी।
- 03ब्रेंट क्रूड की कीमत 89.94 डॉलर तक पहुंच गई थी, लेकिन फिर से बढ़कर 103.94 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
- 04WIT क्रूड की कीमत भी 9% से अधिक गिरी, जो पिछले 6 हफ्तों में सबसे बड़ी गिरावट थी।
- 05अमेरिका और ईरान के बीच 12 अरब डॉलर की फ्रीज रकम को लेकर विवाद बना हुआ है।
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अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम के समझौते के बाद, अमेरिका ने ईरान को 300 अरब डॉलर (लगभग 28.53 लाख करोड़ रुपये) की आर्थिक मदद की पेशकश की है। इस घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 11% की गिरावट आई, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 89.94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि, एक अमेरिकी मिसाइल हमले के बाद कीमतों में तेजी आई, और ब्रेंट क्रूड फिर से 103.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह स्थिति पिछले 7 हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट का संकेत देती है। WTI क्रूड भी 9% से अधिक गिर गया। अमेरिका और ईरान के बीच 12 अरब डॉलर की फ्रीज रकम को लेकर विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच समझौता अभी भी अंतिम चरण में है।
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कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारत जैसे देशों पर आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है, जो तेल आयात पर निर्भर हैं।
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