भारत में जलवायु आपातकाल: पिछले 10 वर्षों में तापमान में वृद्धि का विश्लेषण
क्या भारत ‘Climate Emergency’ की तरफ बढ़ रहा? जानिए बीते 10 सालों में कितना बढ़ गया आपके शहर का तापमान
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भारत के कई शहरों में पिछले 10 वर्षों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे जलवायु आपातकाल की संभावना बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, बांदा, उत्तर प्रदेश में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो भारत को भी जलवायु आपातकाल की घोषणा करनी पड़ सकती है।
- 01दिल्ली में पिछले 10 वर्षों में गर्म दिनों और रातों की संख्या में वृद्धि हुई है, 2024 में तापमान 52°C तक पहुंच गया।
- 02मुंबई का औसत तापमान पिछले दशक में 0.5-0.6°C बढ़ा है, जबकि आर्द्रता 7% बढ़ गई है।
- 03बेंगलुरु में तापमान में 0.5°C की वृद्धि हुई है, जिससे गर्म दिन बढ़ गए हैं।
- 042024 में भारत में 536 दिनों तक हीटवेव का रिकॉर्ड हुआ है, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है।
- 05भारत का औसत तापमान पिछले 10 वर्षों में 0.3-0.4°C बढ़ा है, जो जलवायु आपातकाल की ओर इशारा करता है।
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उत्तर भारत में हाल के दिनों में गर्मी ने कहर मचाया है, विशेषकर बांदा, उत्तर प्रदेश में जहां तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पिछले 10 वर्षों में भारत के विभिन्न शहरों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दिल्ली में गर्म दिनों और रातों की संख्या बढ़ी है, जबकि मुंबई का औसत तापमान 0.5-0.6°C बढ़ा है। बेंगलुरु में भी तापमान में वृद्धि हुई है, जिससे गर्म दिन अधिक हो गए हैं। पूरे देश में हीटवेव की संख्या और तीव्रता में वृद्धि हुई है, 2024 में 536 दिनों तक हीटवेव का रिकॉर्ड बना। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ और भारी बारिश की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, जिससे लोगों की जानें जा रही हैं और कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो भारत को भी जलवायु आपातकाल की घोषणा करनी पड़ सकती है, जैसा कि ब्रिटेन ने किया था।
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जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और हीटवेव से लोगों की स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे बीमारियों और मौतों की संख्या बढ़ रही है।
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