हुमायूं कबीर और चिराग पासवान के बीच गाय की कुर्बानी पर विवाद
'गाय की कुर्बानी..', हुमायूं कबीर पर बरसे चिराग पासवान, जानें पूरा मामला
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पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मवेशियों के वध पर नई गाइडलाइंस जारी करने के बाद, एजेयूपी के नेता हुमायूं कबीर ने गाय की कुर्बानी जारी रखने की चुनौती दी है। इस पर चिराग पासवान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरनाक बताया है।
- 01पश्चिम बंगाल सरकार ने गाय और भैंस के वध पर प्रतिबंध लगाया है, खासकर 14 वर्ष से कम उम्र के जानवरों पर।
- 02चिराग पासवान ने कबीर के बयान को विभाजनकारी और भड़काऊ बताया, जिससे समाज में अशांति फैलने की आशंका है।
- 03हुमायूं कबीर ने कहा कि कुर्बानी के मुद्दे पर मुसलमान कोई समझौता नहीं करेंगे।
- 04बंगाल सरकार का कहना है कि नई गाइडलाइंस का ईद के त्योहार से कोई सीधा संबंध नहीं है।
- 05कोर्ट ने कहा कि गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
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पश्चिम बंगाल सरकार ने आगामी ईद-उल-अधा से पहले मवेशियों के वध पर नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके बाद राजनीतिक और धार्मिक विवाद बढ़ गया है। आम जनता पार्टी (एजेयूपी) के नेता हुमायूं कबीर ने इन गाइडलाइंस को चुनौती देते हुए गाय की कुर्बानी जारी रखने की बात कही है। इस पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसे उन्होंने समाज के लिए खतरनाक बताया। पासवान ने कबीर के भड़काऊ बयानों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे बयान समाज में तनाव पैदा करते हैं। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब पश्चिम बंगाल सरकार ने 14 वर्ष से कम उम्र के मवेशियों के वध पर प्रतिबंध लगाया। कबीर ने कहा कि वे कुरान के अनुसार कुर्बानी जारी रखेंगे, जबकि सरकार का कहना है कि ये गाइडलाइंस मवेशियों के संरक्षण के लिए हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
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इस विवाद के चलते पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जो सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है।
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