कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: खुले में जानवरों की कटाई पर रोक, गाय की कुर्बानी अनिवार्य नहीं
ईद से पहले कलकत्ता HC का बड़ा फैसला: खुले में कटाई पर रोक, ‘गाय की कुर्बानी जरूरी नहीं’

Image: Ndtv
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार के पशु वध नियमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ईद-उल-अजहा में गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और खुले में जानवरों की कटाई पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- 01कोर्ट ने कहा कि 13 मई की सरकारी नोटिफिकेशन 2018 के पुराने आदेशों को लागू करती है।
- 02जानवरों की कटाई के लिए 'फिट फॉर स्लॉटर' सर्टिफिकेट आवश्यक होगा।
- 03केवल 14 साल से अधिक उम्र के या बीमार जानवरों की कटाई की अनुमति होगी।
- 04याचिकाकर्ताओं ने नियमों को बकरीद की कुर्बानी के लिए कठिन बताया।
- 05कोर्ट ने छूट पर 24 घंटे के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार के पशु वध संबंधी नियमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 13 मई की सरकारी नोटिफिकेशन कोई नई नहीं है, बल्कि यह 2018 में दिए गए पुराने आदेशों को लागू करती है। कोर्ट ने कहा कि खुले में जानवरों की कटाई पर पूरी तरह रोक रहेगी और यह भी स्पष्ट किया कि ईद-उल-अजहा में गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। इसके अलावा, राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, जानवरों की कटाई के लिए 'फिट फॉर स्लॉटर' सर्टिफिकेट आवश्यक होगा। केवल वही जानवर काटे जा सकेंगे जो 14 साल से अधिक उम्र के हों या बीमार/चोट के कारण अक्षम हों। याचिकाकर्ताओं ने इन नियमों को बकरीद की कुर्बानी के लिए कठिन बताया और कोर्ट से छूट देने की अपील की। हालांकि, हाईकोर्ट ने छूट पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है, क्योंकि ईद 27-28 मई को मनाई जानी है।
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इस फैसले से बकरीद पर कुर्बानी करने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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