चीन की कोल रॉक गैस तकनीक: ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम
China Coal Rock Gas: मिडिल ईस्ट से फंसी सप्लाई तो चीन चट्टानों को चीरकर निकालने लगा गैस, बड़ा है प्लान, भारत के लिए संकेत
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चीन ने मिडिल ईस्ट से गैस सप्लाई बाधित होने के कारण गहरी कोयला चट्टानों से गैस निकालने की तकनीक विकसित की है, जिसे 'कोल रॉक गैस' कहा जाता है। पेट्रोचाइना के विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2035 तक यह तकनीक 30 अरब क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन कर सकती है, जो चीन की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में सहायक होगी।
- 01पेट्रोचाइना की योजना है कि 2035 तक 'कोल रॉक गैस' का उत्पादन 30 अरब क्यूबिक मीटर तक पहुंचेगा।
- 02चीन की गैस खपत 2040 तक 600 से 650 अरब क्यूबिक मीटर तक पहुँचने की संभावना है।
- 03चीन ने 700 से अधिक 'कोल रॉक गैस' कुएं खोद लिए हैं, जिनमें से अधिकांश दाजी क्षेत्र से हैं।
- 04सीआरजी के उत्पादन में लागत की समस्या है, जो शेल गैस की तुलना में अधिक है।
- 05भारत भी चीन की तरह गहरी हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग तकनीक अपनाकर अपने कोयला भंडार से गैस निकाल सकता है।
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चीन ने मिडिल ईस्ट से गैस सप्लाई बाधित होने के कारण अपने विशाल कोयला भंडारों से गहरी कोल रॉक गैस (सीआरजी) निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पेट्रोचाइना के विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2035 तक चीन 30 अरब क्यूबिक मीटर सीआरजी का उत्पादन कर सकता है, जो पिछले साल के शेल गैस उत्पादन से अधिक होगा। इस तकनीक का विकास ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। चीन की गैस खपत 2040 तक 600 से 650 अरब क्यूबिक मीटर तक पहुँचने की संभावना है, जिससे उसकी आयातित लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) पर निर्भरता कम होगी। इस बीच, भारत के लिए यह तकनीकी सफलता एक महत्वपूर्ण संकेत है, क्योंकि भारत भी अपने कोयला भंडार से गैस निकालने के लिए इसी तरह की तकनीकों को अपना सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को गहरी हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग और हॉरिजेंटल ड्रिलिंग तकनीकों को अपनाकर अपने गैस स्रोतों को अनलॉक करने की आवश्यकता है।
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भारत को गहरी हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग तकनीक अपनाकर अपने कोयला भंडार से गैस निकालने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है, जिससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
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