सुप्रीम कोर्ट ने ट्रामा केयर को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना
ट्रामा केयर का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग : सुप्रीम कोर्ट

Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों के ट्रामा केयर के अधिकार को जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग बताया है। सभी राज्यों को '112' हेल्पलाइन स्थापित करने और तीन महीने में ट्रामा केयर प्रोटोकॉल लागू करने का निर्देश दिया गया है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने ट्रामा केयर को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है।
- 02राज्यों को तीन महीने में एक ही हेल्पलाइन नंबर '112' चालू करने का निर्देश दिया गया है।
- 03सुप्रीम कोर्ट ने ट्रामा मामलों के लिए 'चिकित्सकीय बचाव प्रोटोकॉल' जारी करने की अनुमति दी।
- 04राज्यों को मासिक बैठकें आयोजित करने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।
- 05सभी पंजीकृत एम्बुलेंस में जीपीसी या लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का आदेश दिया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नागरिकों के ट्रामा केयर के अधिकार को जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग मानते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर आपातकालीन सेवाओं के लिए एक ही हेल्पलाइन नंबर '112' चालू करने का आदेश दिया। इसके साथ ही, जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की पीठ ने 'सेवलाइफ फाउंडेशन' की याचिका पर ट्रामा केयर के लिए एक 'चिकित्सकीय बचाव प्रोटोकॉल' जारी करने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी कहा कि सभी पंजीकृत एम्बुलेंस में जीपीसी या लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस अनिवार्य होंगे। इसके अलावा, राज्यों को मासिक बैठकें आयोजित कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह कदम उन बाधाओं को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है जो ट्रामा के समय मदद के लिए हिचकिचाहट का कारण बनती हैं।
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यह निर्णय ट्रामा के समय नागरिकों को त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करेगा।
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