मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का प्रयास
500 साल पुराने बांस पत्र और ताड़पत्र में छिपे मिथिला के राज, जानिए कौन बचा रहा धरोहर?

Image: News 18 Hindi
पूर्णिया, बिहार में पंडित विद्यानंद झा 500 साल पुरानी ताड़पत्र और बांस पत्र पर लिखी पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलीकरण कर रहे हैं। यह कार्य मिथिला की पारिवारिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण है। उन्हें हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया है।
- 01पंडित विद्यानंद झा ने 500 साल पुरानी पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलीकरण शुरू किया है।
- 02यह पांडुलिपियाँ मिथिला के इतिहास और पारिवारिक वंशावली का दस्तावेज हैं।
- 03पंडित झा के परिवार में पिछले 19 पीढ़ियों से पंजीकरण का कार्य किया जा रहा है।
- 04इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण हिंदी में किया जा रहा है।
- 05जिला प्रशासन ने पंडित झा के कार्य के लिए उन्हें हाल ही में सम्मानित किया है।
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पूर्णिया, बिहार में पंडित विद्यानंद झा ने 500 साल पुरानी ताड़पत्र और बांस पत्र पर लिखी पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलीकरण करने का कार्य शुरू किया है। यह पांडुलिपियाँ मिथिला की पारिवारिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। पंडित झा का कहना है कि उनके परिवार में पिछले 19 पीढ़ियों से पंजीकरण का कार्य किया जा रहा है, जो रामायण काल से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि ताड़पत्र पर लिखी पांडुलिपियों में मिथिला का इतिहास छिपा हुआ है। पंडित झा ने इन पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सावधानी बरती है और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर उनका डिजिटलीकरण कर रहे हैं। इस कार्य के लिए उन्हें हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया है। निरंजन झा, आकाशवाणी पूर्णिया के उद्घोषक ने कहा कि यदि सरकार पंडित झा को मदद करे तो यह अमूल्य धरोहर भविष्य के लिए सुरक्षित की जा सकती है।
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पंडित विद्यानंद झा का कार्य मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में सहायक है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और परंपराओं का ज्ञान प्राप्त होगा।
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