महाराजा कंस पासी और मस्जिद विवाद: ऐतिहासिक दावे और वर्तमान स्थिति
कौन हैं महाराजा कंस पासी? जिनके किले को लेकर शुरू हुआ विवाद, मस्जिद-कब्रिस्तान पर बड़ा दावा
Image: Nbt Navbharattimes
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में महाराजा कंस पासी के किले और एक मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ गया है। पासी समाज का दावा है कि किला उनके पूर्वज का है और वहां पूजा होती थी, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कब्रिस्तान और मस्जिद मानता है। इस मुद्दे पर पासी समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कार्रवाई की मांग की है।
- 01पासी समाज का दावा है कि कांसमंडी का किला महाराजा कंस का है, जहां पहले पूजा होती थी।
- 02महाराजा कंस पासी का शासन 980 से 1031 के बीच अवध क्षेत्र में था।
- 03पासी समाज ने किले के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू किया है।
- 04मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह स्थान सरकारी दस्तावेजों में कब्रिस्तान और मस्जिद के रूप में दर्ज है।
- 05मलिहाबाद में विवाद के चलते माहौल गरमाता दिख रहा है।
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लखनऊ, उत्तर प्रदेश में महाराजा कंस पासी के किले और एक मस्जिद के बीच विवाद गहराता जा रहा है। पासी समाज के लोग इसे महाराजा कंस का किला मानते हैं और उनका दावा है कि पहले यहां पूजा होती थी, जबकि अब नमाज पढ़ी जा रही है। पासी समाज के नेता सूरज पासवान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर किले को पुनर्जीवित करने की मांग की है। स्थानीय इतिहास के अनुसार, महाराजा कंस पासी ने 980 से 1031 तक इस क्षेत्र पर शासन किया और विदेशी आक्रमणकारियों का सामना किया। दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह स्थान सरकारी दस्तावेजों में कब्रिस्तान और मस्जिद के रूप में दर्ज है। मौलाना सूफियान ने कहा कि मस्जिदों को मंदिर बनाने का यह ट्रेंड गलत है और इस प्रकार के दावे विवाद को बढ़ा रहे हैं। मलिहाबाद में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और पासी समाज ने किले के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
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इस विवाद के चलते स्थानीय समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
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