इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: मां की मौत के बाद पिता बने बच्चे के प्राकृतिक अभिभावक
कानून की नजर में मां की मौत के बाद बच्चों का नेचुरल गार्जियन कौन? इलाहाबाद हाईकोर्ट से बताया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक 13 महीने के बच्चे की कस्टडी मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि मां की मृत्यु के बाद पिता ही बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक होता है। कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी पिता को सौंपते हुए उसके विकास और भलाई को प्राथमिकता दी।
- 01मां की मौत के बाद पिता को बच्चे की कस्टडी दी गई।
- 02कोर्ट ने पिता को प्राकृतिक अभिभावक माना।
- 03बच्चे की भलाई को सर्वोपरि माना गया।
- 04पिता की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा गया।
- 05ननिहाल पक्ष को मुलाकात का अधिकार दिया गया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें 13 महीने के बच्चे की कस्टडी उसके पिता को दी गई है। कोर्ट ने कहा कि मां की मृत्यु के बाद पिता ही बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक होता है। इस मामले में, बच्चे की मां का निधन फरवरी 2025 में एक असफल आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान हुआ था। कोर्ट ने यह भी माना कि यदि बच्चे की कस्टडी पिता को नहीं दी जाती, तो बच्चे का विकास प्रभावित हो सकता है। कोर्ट ने पिता की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा और कहा कि वह बच्चे की देखभाल करने में सक्षम है। ननिहाल पक्ष के लोगों को बच्चे से मिलने का अधिकार दिया गया है, ताकि बच्चे का मातृ पक्ष के साथ भावनात्मक संबंध बना रहे। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि बच्चे के हितों के खिलाफ कोई परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित पक्ष फिर से विधिक उपाय अपना सकते हैं।
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इस फैसले से बच्चों की कस्टडी के मामलों में पिता के अधिकारों को मजबूत किया गया है, जिससे बच्चों का विकास और भलाई सुनिश्चित हो सकेगी।
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