एनजीटी ने हरिद्वार में गंगा प्रदूषण पर सख्त कदम उठाए
हरिद्वार में गंगा में गिरते सीवर व गंदे नालों पर एनजीटी सख्त, अफसर तलब
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हरिद्वार में गंगा में गिरते गंदे नालों और सीवर प्रदूषण के मामले में कई सरकारी विभागों को नोटिस जारी किया है। याचिका में गंगा की अविरल धारा को अवरुद्ध करने और प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए गए हैं। अगली सुनवाई 24 जुलाई 2026 को होगी।
- 01हरिद्वार निवासी रतनमणि डोभाल ने गंगा में गिरते गंदे नालों और सीवर प्रदूषण के खिलाफ याचिका दायर की है।
- 02एनजीटी ने संबंधित विभागों को जल के नमूने लेकर वैज्ञानिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
- 03गंगा में गिरने वाले बिना उपचारित गंदे पानी के स्थानों का उल्लेख याचिका में किया गया है।
- 04हरकी पैड़ी पर गंगाजल की उपलब्धता के मुद्दे को भी उठाया गया है।
- 05अगली सुनवाई में विभागों को गंगा प्रदूषण रोकने के लिए की गई कार्रवाइयों का स्पष्टीकरण देना होगा।
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हरिद्वार में गंगा में गिरते गंदे नालों और सीवर प्रदूषण के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त कदम उठाए हैं। याचिका दायर करने वाले हरिद्वार निवासी रतनमणि डोभाल ने गंगा में गिरते गंदे नालों और दूषित जल निकासी की समस्या को उठाया है। एनजीटी ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, उत्तराखंड जल संस्थान, पेयजल निगम, मेला प्रशासन, जिलाधिकारी हरिद्वार, नमामि गंगे मिशन और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किए हैं। अगली सुनवाई 24 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। एनजीटी ने निर्देश दिया है कि जल के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई जाए और रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत की जाए। इसके अलावा, गंगा में गिरने वाले बिना उपचारित गंदे पानी के स्थानों का भी उल्लेख किया गया है। एनजीटी के इस सख्त रुख से उम्मीद है कि जिम्मेदार विभागों में जागरूकता बढ़ेगी और गंगा की स्वच्छता के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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यह निर्णय हरिद्वार के निवासियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गंगा की स्वच्छता और जल गुणवत्ता सीधे उनके जीवन पर प्रभाव डालती है।
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