दिल्ली में पौधारोपण का ऑडिट न होने से करोड़ों का नुकसान
'पानी की तरह बहा दिए करोड़ों रुपये', दिल्ली में लगाए गए लाखों पेड़ों का PWD के पास नहीं कोई हिसाब
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Image: Jagran
दिल्ली में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 2019 के बाद से सड़कों पर लगाए गए लाखों पौधों का कोई थर्ड पार्टी ऑडिट नहीं कराया है। इस लापरवाही के चलते करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, जीवित पेड़ों की संख्या का कोई आधिकारिक डेटा नहीं है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ गई है।
- 01पीडब्ल्यूडी ने 2019 के बाद से सड़कों पर लगाए गए पौधों का कोई थर्ड पार्टी ऑडिट नहीं कराया है।
- 02नियमों के अनुसार, पौधों की उत्तरजीविता दर की जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराना अनिवार्य है।
- 03पौधों की देखरेख न होने के कारण अधिकांश पौधे मर जाते हैं।
- 04ऑडिट न होने से अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत की संभावना बढ़ गई है।
- 05दिल्ली के पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है।
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दिल्ली में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लापरवाही के चलते 2019 के बाद से सड़कों पर लगाए गए लाखों पौधों का कोई थर्ड पार्टी ऑडिट नहीं कराया गया है। इस स्थिति ने करोड़ों रुपये के खर्च के बावजूद जीवित पेड़ों की संख्या का कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं होने की समस्या खड़ी कर दी है। नियमों के अनुसार, पौधों की उत्तरजीविता दर की जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराना अनिवार्य है, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने जानबूझकर इस प्रक्रिया से बचने का प्रयास किया है। जानकारों का मानना है कि इस ऑडिट को न कराने के पीछे भ्रष्टाचार का बड़ा खेल हो सकता है, जिससे ठेकेदारों को बिना उचित सत्यापन के भुगतान किया जा सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि हर साल लाखों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे सूख जाते हैं। इस स्थिति से सरकारी खजाने को भी नुकसान हो रहा है।
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इस स्थिति से सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है, जिससे जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।
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