तेल कंपनियों पर आर्थिक बोझ: हर दिन ₹1700 करोड़ का नुकसान, क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
तेल कंपनियों पर बड़ा आर्थिक बोझ: हर दिन ₹1700 करोड़ का नुकसान, क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
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भारतीय सरकारी तेल कंपनियां, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम, हर दिन लगभग ₹1700 करोड़ का घाटा सहन कर रही हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, पेट्रोल और डीजल की दरें स्थिर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दाम बढ़ाना अब सरकार के हाथ में है।
- 01तेल कंपनियों को हर दिन ₹1700 करोड़ का घाटा हो रहा है।
- 02पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो साल से स्थिर हैं।
- 03कच्चे तेल की कीमतों में 50% की वृद्धि हुई है।
- 04सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है।
- 05कंपनियों की वित्तीय स्थिति देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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दुनिया भर में ऊर्जा संकट के बीच, भारतीय सरकारी तेल कंपनियां, इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), हर दिन लगभग ₹1700 करोड़ का घाटा सहन कर रही हैं। पिछले 10 हफ्तों में, कच्चे तेल की कीमतों में 50% की वृद्धि के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में, पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और डीजल की 87.67 रुपये प्रति लीटर है। इस स्थिति के कारण कंपनियों को भारी कर्ज लेना पड़ सकता है और भविष्य की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, जिससे उसे हर महीने 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाना अब सरकार के हाथ में है, और यह निर्णय देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो यह आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की लागत बढ़ा सकती है, जिससे परिवहन और दैनिक आवश्यकताओं की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।
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