पद्मश्री बशीर बद्र का निधन: साहित्य जगत में शोक की लहर
उजाले अपनी यादों के हमारे पास रहने दो..., पद्मश्री बशीर बद्र के निधन पर पैतृक गांव में पसरा सन्नाटा

Image: Jagran
प्रसिद्ध शायर पद्मश्री बशीर बद्र का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका पैतृक गांव अंबेडकरनगर जिले के बुकिया में है, जहां उनके निधन की खबर से शोक का माहौल है। उनकी रचनाएं आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं।
- 01बशीर बद्र का असली नाम सैयद मोहम्मद बशीर था, और उनका जन्म 15 फरवरी 1935 को कानपुर में हुआ।
- 02उन्होंने 1967 में पुलिस विभाग की नौकरी छोड़कर शायरी को अपना करियर बनाया।
- 03बशीर बद्र की शायरी सरल और संवेदनशील थी, जिससे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।
- 04उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में 'लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में' और 'दुश्मनी जमकर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे' शामिल हैं।
- 05साहित्यिक जगत के कई प्रमुख व्यक्तियों ने उनके निधन को अपूर्णीय क्षति बताया है।
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प्रसिद्ध शायर पद्मश्री बशीर बद्र का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जिससे साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका पैतृक गांव अंबेडकरनगर जिले के बुकिया में है, हालांकि उनके पिता का नाता वहां से दशकों पहले टूट चुका था। बशीर बद्र ने अपनी सरल और संवेदनशील शायरी के माध्यम से न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई। उनका असली नाम सैयद मोहम्मद बशीर था, और उनका जन्म 15 फरवरी 1935 को कानपुर में हुआ। उन्होंने 1967 में पुलिस की नौकरी छोड़कर शायरी को अपना करियर बनाया। उनकी कई रचनाएं आज भी लोगों की जुबां पर हैं, जैसे 'लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में'। उनके निधन पर जिले के साहित्यकारों ने इसे एक अपूर्णीय क्षति बताया है।
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बशीर बद्र के निधन से अंबेडकरनगर जिले के साहित्यिक समुदाय में गहरा शोक है।
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